भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में एक महीने के 14वें अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम मॉलिक्युलर बायोलॉजिकल टेक्निक्स फॉर रिसर्च इन एग्रीकल्चर एंड बायोमेडिकल साइंसेस का मंगलवार को समापन हो गया। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अधीन संचालित टीसीएस कोलंबो योजना के प्रशिक्षण कार्यक्रम में बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और फिजी के मेडिकल, कृषि, जीवविज्ञान, पशु चिकित्सा आदि के 12 प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
मुख्य अतिथि एवं संस्थान के संयुक्त निदेशक (शोध) डॉ. बीपी मिश्रा ने कहा कि इस संस्थान में विभिन्न विज्ञान विषयों में सीखने के लिए उपयुक्त माहौल और विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। यहां पर नैनो टेक्नोलॉजी, स्टेम सेल आदि विषयों के विशेषज्ञ अपने रिसर्च से दूसरे विज्ञान विषयों को भी लाभान्वित कर रहे हैं। संस्थान के पूर्व राष्ट्रीय प्रोफेसर डॉ. भास्कर शर्मा ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुभवों को प्रशिक्षणार्थियों को बताते हुए कहा कि बहुत से ऐसे जीन है, जो मानव, पशु, पौधे आदि में समान रूप से जीवन के लिए जरूरी हैं, उन्हें पहचानने की जरूरत है। प्रशिक्षण कार्यक्रम की निदेशक डॉ. मीना कटारिया ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
प्रशिक्षणार्थियों ने प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए। इस मौके पर डॉ. परितोष जोशी, सह निदेशक डॉ. मनीष महावर, डॉ. चंद्र मोहन, डॉ. मुकेश कुमार आदि वैज्ञानिक और छात्र मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अजय कुमार ने किया और डॉ. संजीव भूरे ने आभार व्यक्त किया।