30 जून तक जो स्टाक बचेगा। इस अवधि में उसका टैक्स व्यापारी सरकार को पहले ही दे चुके होंगे। जीएसटी लागू होने के बाद सरकार इस स्टाक पर टैक्स कैसे वसूलेगी। क्या पुराना स्टाक एक जुलाई में ओपनिंग स्टाक के तौर ले जाया जाएगा या क्लोजिंग स्टाक 30 जून को ही समाप्त माना जाएगा। जीएसटी लागू होने पर सरकार नई कर प्रणाली के तहत एक शुरू से ही टैक्स वसूलेगी या तीन महीने का टैक्स पुरानी दरों पर लगेगा।
ये समस्या सेंट्रल यूपी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से सिविल लाइंस स्थित एक होटल में हुए सेमिनार में सेंट्रल एक्साइज और वाणिज्य कर विभाग के अफसरों के सामने उद्यमियों ने रखी। एक जुलाई से प्रस्तावितकेंद्र सरकार की नई कर प्रणाली (जीएसटी) के बारे में सेंट्रल एक्साइज के ज्वाइंट कमिश्नर रोशन लाल और आईआरएस डा. शशांक यादव प्रचलित वैट व्यवस्था से जीएसटी में जाने पर आने वाली भ्रांतियों को दूर किया और नई व्यवस्था को सरलता से अपनाने के तरीके बताए। मुख्य वक्ता सीए कपिल वैश्य ने नई कर व्यवस्था में ट्रांजिशनल प्रोविजन की व्याख्या की। दुर्गेश चौहान ने जीएसटी रिटर्न, अभिषेक मयंक ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बारे में बताया। असिस्टेंट कमिश्नर मनोज प्रभाकर ने नई कर प्रणाली से होने वाले फायदों की विस्तार से व्याख्या की। संस्था अध्यक्ष घनश्याम खंडेलवाल ने अधिकारियों की मौजूदगी में कहा कि उनके समझाने से जीएसटी पर उद्यमियों का मनोबल बढ़ा है। भविष्य में किसी तरह के संशय या परेशानी होने पर सेंट्रल एक्साइज और वाणिज्य कर विभाग उनकी समस्याओं का समाधान करेगा। सेमिनार में ज्वाइंट कमिश्नर यूएस दुबे, डा. सूबे सिंह यादव, अंशुमन सिंह, सुप्रीडेंट हरवंश कौर का भी योगदान रहा। संचालन संस्था सचिव विमल रेवाड़ी और इंस्पेक्टर सुनील यादव ने किया।