राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भूकंप के पैमाने पर सेस्मिक जोन-4 में आने वाले बरेली को भूकंपरोधी मॉडल जिला बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। यूपी का यह पहला जिला है जिसका चयन भूकंपरोधी जिला बनाने के लिए किया गया है। इसके लिए प्राधिकरण ने जिला प्रशासन से जिले के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर डिटेल रिपोर्ट मांगी है। यह पता कराया जा रहा है कि जिले में पुरानी इमारतें कितनी है। पुराने भवनों को भूकंपरोधी किस तरह बनाया जा सकता है और नए भवनों को किस तरह बनाया जाए ताकि भूकंप आने की स्थिति में जनहानि न हो।
यूपी में हिमालय के नजदीक जिलों में शामिल बरेली में भी भूकंप का खतरा महसूस किया जा रहा है। 2014 में नेपाल में भूकंप से बर्बादी के बाद एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अर्थक्वेक रेजीडेंसियल मॉडल डिस्ट्रिक प्रोग्राम (ईआरएमडीपी) के तहत प्रदेश में बरेली को भूकंपरोधी मॉडल बनाने के लिए चुना है। एडीएम वित्त मनोज ने बताया कि बीडीए, नगर निगम, शिक्षा विभाग, पुलिस और प्रशासन समेत सभी विभागों से डिटेल रिपोर्ट मांगी गई है। कुछ विभागों की रिपोर्ट आनी है, इसके बाद रिपोर्ट प्राधिकरण को भेज दी जाएगी। बरेली में खाका बनने के बाद उसे दूसरे जिलों में लागू किया जाएगा।
इन बिंदुओं पर मांगी है रिपोर्ट
भवनों की स्थिति
जिला प्रशासन को जिले की के कुल भवनों के बारे में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को बताना है। इसमें पुराने भवनों की जानकारी देनी है। भवन कितने साल पहले बने थे। मसलन कलक्ट्रेट जैसे भवनों के बारे में यह जानकारी देनी है कि कितने साल पहले यह बनाए गए थे। भूकंप आने की स्थिति में इस भवनों को कितना नुकसान हो सकता है। नए भवन कितने हैं। किस मानक से भवनों की निर्माण कराया जा रहा है। भवन कितने मजबूत हैं। प्राधिक रण के वैज्ञानिक मंथन के बाद यह तय करेंगे कि इन भवनों को भूकंप से किस तरह बचाया जा सकता है।
कार्यदायी संस्थाओं के मानक
जिले की कार्यदायी संस्था बीडीए, नगर निगम, आवास विकास आदि किस डेंसिटी का सीमेंट भवनों के निर्माण में इस्तेमाल कर रही हैं। कितने भवन भूकंपरोधी बनाए गए हैं। लोहा कितना लगाया जा रहा है। भवन निर्माण करने वालों को किस आधार पर अनुमति दी जा रही है। प्राधिकरण में मंथन होने के बाद भवन निर्माण को नए मानक तय होंगे।
मिट्टी का हाल
बरेली की मिट्टी लोचदार है। माना जा रहा है कि इसलिए यहां भूकंप का खतरा ज्यादा बना रहता है। ब्योरा मिलने के बाद मिट्टी की स्थिति भी देखी जाएगी। इसके बाद इसका कोई उपाय तलाशने पर काम होगा। भवन बनाते समय आगे किस तरह की की एहतियात रखी जाएगी यह प्राधिकरण के भूगर्भ वैज्ञानिक तय करेंगे। बुनियाद कितनी गहरी खोदी जाएगी, इस पर ओपीनियन दी जाएगी।
बचाव कार्य कैसे होंगे
भूकंप आने की स्थिति में पुराने शहर में बचाव कार्य करना सबसे ज्यादा मुश्किल होगा। इसके अलावा और भी घनी आबादी वाले इलाकों में बचाव कार्य करने में दिक्कतें आती हैं। प्राधिकरण ने ऐसे इलाकों में घर किस तरह बने हैं। घनी आबादी वाले कितने इलाके हैं। इसका ब्यौरा नगर निगम को देना है। प्राधिकरण के वैज्ञानिक इस मुद्दे पर भी मंथन करने के बाद बचाव का आसान तरीका तलाश करेंगे। जिले को उसी हिसाब से साधन मुहैया कराए जाएंगे।