बरेली। गृहकर का क्लेश खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। अब नगर निगम ने नौ साल पहले बने मकान पर 44 साल का कर लगाते हुए बिल भेज दिया। आरईएस से सेवानिवृत जेई की पत्नी ने इसकी शिकायत की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में उन्होंने भूखंड खरीदा था। नौ साल पहले ही उस पर मकान बनवाया है। निगम ने जब से बिल भेजा है, तब मकान तो दूर, उन्होंने भूखंड भी नहीं खरीदा था।
आरईएस से सेवानिवृत राकेश बाबू शुक्ला की पत्नी सुनीला देवी ने लिखित शिकायत देकर बताया कि उनका गृहकर 1,581 रुपये प्रतिवर्ष है। उन्हें पहली बार बिल मिला है, जिसमें कुल कर 69,992 रुपये दर्शाया गया है। इससे साफ हो रहा है कि नगर निगम ने 44 साल का कर लगाया है। तब न तो उनका मकान था, न ही भूखंड। ऐसे में 69 हजार रुपये से अधिक बिल क्यों भेजा, यह समझ से परे है। राकेश ने बताया कि उन्होंने खुद ही आईडी नंबर बनवाया और नगर निगम में जाकर अपना बिल बनवाने के लिए कहा था, पर निगम इतना ज्यादा बिल भेज देगा, इसका अंदाजा नहीं था।
शिकायत मिली है। जो आपत्ति है, उसको ठीक कराया जाएगा। नियमानुसार ही गृहकर वसूल किया जाएगा। - राजवीर सिंह, प्रभारी कर निर्धारण अधिकारी
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