बरेली। कार्तिक मास में गंगा दशहरा पर लगने वाला ऐतिहासिक चौबारी मेला आधी-अधूरी तैयारियों के बीच सोमवार से शुरू हो रहा है। यहां खेल तमाशों, झूलों और तमाम मनोरंजन के बीच घोड़ों का नखासा (बाजार) बहुत खास होता है। खास तौर से यहां होने वाली घोड़ों की दौड़ आकर्षण का केंद्र होती है।
रामगंगा के किनारे लगने वाले इस मेले में विभिन्न प्रांतों से तरह-तरह की नस्ल और रंग के घोड़े आने लगे हैं। यह नखासा पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा घोड़ों का बाजार होता है। इसमें खास तौर से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश के जिले बटेश्वर, देवा शरीफ से खास नस्लों के घोड़े आते हैं, जो दो से तीन लाख रुपये तक के बिकते हैं। इसमें बालूतर, पंजाब, काठियावाड़, पाकिस्तान बाॅर्डर सिंध कच्छ, काबुल, के साथ कई देशी नस्लों के घोड़ों की भी मांग रहती है। घोड़ों का रंग भी खास अहमियत रखता है। इनमें सबसे अधिक टेलिया कुंबैत (काले बाल), श्वेत (सफेद), अबलख (काली-सफेद चित्तीदार), लाल और आम हुम हमरंग (पूरा एक रंग का) जैसे रंगों के घोड़ों की यहां मांग रहती है।
इसी तरह मेले में दुकानों का बाजार भी सज रहा है। इसमें घर में इस्तेमाल होने वाली हर चीज यहां उपलब्ध होती है। यहां तक दाल-मसालों से लेकर लकड़ी के सामान और सिलबट्टे तक सब कुछ मिलेगा। वहीं मनोरंजन के लिए जहां विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े धूले हैं वहीं मिनी सर्कस और जादू के तमाशे लग रहे हैं जिनकी तैयारी अभी चल रही है।
इनसब के बावजूद अभी स्नान के लिए घाट अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। मुख्य मार्ग से मेले में प्रवेश करने वाला मार्ग भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं है। सिर्फ पैच वर्क से काम चलाया गया है। घाट भी अभी तैयार किए जा रहे हैं जो फिलहाल स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। इस तरह कहें तो अभी तैयारी पूरी नहीं है।
सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम
मेले के लिए तमाम सुरक्षा व्यवस्था के भी इंतजाम किए गए हैं। एक तरह पुलिस बल की तैनाती रहेगी,वहीं मेला मैदान पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। खास तौर से गंगा में स्नान के लिए आने श्रद्धालुओं की सुरक्षा में 40 गोताखोर भी लगाए गए हैं। मैदान पर पीने के पानी आदि की भी व्यवस्था की गई है। संवाद