गांव के लाहौरी प्रसाद ने कहा कि गांव में हमने कभी होलिका दहन नहीं देखा है। इसका किसी ने समाधान भी नहीं निकाला। परपंराओं को तो कायम रहना चाहिए, इसके लिए संयुक्त प्रयास होने चाहिए। बेचेलाल ने कहा कि नई पीढ़ी को इस पर ध्यान देना चाहिए। होली दहन न होना हमारे गांव के लिए अच्छा नहीं है। इससे न सिर्फ त्योहार का आनंद कम हो जाता है, बल्कि एक परंपरा भी टूटी है।
'होलिका दहन शुरू कराना चाहिए'
लालसिंह ने कहा कि हिंदू मान्यता के त्योहार को पौराणिक परंपरा से न मनाना हम लोगों के लिए सही नहीं है। संभ्रांत नागरिकों को पुन: होलिका दहन शुरू कराना चाहिए। वेदराम ने बताया कि उस समय लोग अशिक्षित थे, दो जातियों के टकराव से त्योहार बंद करा दिया। उस समय ही लोग बैठकर ही बात करते तो समस्या का समाधान निकल जाता। मामूल बात पर परंपराओं को तोड़ना नहीं चाहिए।
पूर्व प्रधान बदन सिंह ने कहा कि गांव में होली के समय विवाद होने के कारण जब से यह परंपरा बंद हुई तब से इसे शुरू कराने का किसी ने कोई प्रयास नहीं किया। अब तो होली वाली जगह पर मकान बन गये हैं। होली रखने का स्थान भी नहीं बचा है।
प्रधान कुंवर पाल ने बताया कि पूरे गांव में सहमति बनाने का प्रयास नहीं हुआ। अब तो वर्षों से यह नहीं हो रहा है। नई परंपरा के लिये अनुमति लेनी पड़ेगी वहीं स्थान चयन भी सामूहिक सहमति से करना पड़ेगा। हम प्रयास करेंगे कि अगले वर्ष तक इसमें सफलता मिल जाए और गांव में होलिका दहन शुरू हो जाए।