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हिस्ट्रीशीटर को पैर में गोली मारकर पकड़ा, साथी भाग निकला

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पकड़ा गया मुकेश कश्यप। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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लूट और डकैती 19 मुकदमे दर्ज हैं मनोज पर, गैंग रात को ही करता है वारदात

बरेली। सुभाषनगर थाने का हिस्ट्रीशीटर और टॉपटेन बदमाशों की सूची में शामिल बदमाश मनोज कश्यप को पुलिस ने पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया। उसका साथी अजय उर्फ गुल्ला मौके से भाग निकला। मनोज के ऊपर लूट, डकैती जैसे 19 मामले दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक गैंग के बदमाश रात को ही वारदात करते हैं।
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सुभाषनगर थाने के इंस्पेक्टर सुनील कुमार के मुताबिक गुरुवार देर रात पुलिस टीम के साथ वह गश्त कर रहे थे। तभी मुखबिर से सूचना मिली कि सिटी श्मशान भूमि के पास कुछ लोग संदिग्ध स्थिति में खड़े हैं। पुलिस वहां पहुंची तो बदमाशों ने फायरिंग कर दी। एक गोली दरोगा सुशील कुमार की बांह से छूती हुई चली गई। इसके बाद पुलिस ने जवाबी फायरिंग की तो एक बदमाश बाएं पैर में गोली लगने से घायल हो गया जबकि दूसरा भाग निकला। पुलिस घायल बदमाश को अस्पताल ले गई। वहां पता लगा कि वह सुभाषनगर क्षेत्र के जज साहब का हाता निवासी मनोज कश्यप है। उसके खिलाफ 19 मामले पहले से दर्ज हैं। मौके से भागे साथी अजय उर्फ गुल्ला के खिलाफ भी छह मामले दर्ज हैं।

दीवार के सहारे छत पर चढ़ जाता है मनोज

इंस्पेक्टर ने बताया कि मनोज और अजय दोनों ही सुभाषनगर थाना क्षेत्र के कुख्यात बदमाश हैं। इनके गैंग में कुछ और भी बदमाश हैं। मनोज अपना घर छोड़कर काफी समय से सीबीगंज क्षेत्र में किराये पर कमरा लेकर रह रहा था। यह गैंग रात 12 बजे के बाद ही चोरी, लूट जैसी घटनाएं करता है। इस वजह से इनके पड़ोस में रहने वालों को नहीं पता है कि ये लोग चोर लुटेरे हैं। मनोज के बारे में बताया जाता है कि वह दो मंजिल तक दीवार के सहारे चढ़ जाता है।

मनोज के धोखे में पड़ोसी को पुलिस ने भेजा था जेल

करीब तीन साल पहले चोरी के एक मामले में पुलिस ने मनोज की तलाश में दबिश दी थी। पुलिस धोखे में पड़ोसी मनोज हलवाई को उठा ले गई थी और जेल भेज दिया था। काफी समय तक मनोज हलवाई की पत्नी अधिकारियों के दफ्तरों पर चक्कर लगाती रही। बाद में तत्कालीन एडीजी प्रेमप्रकाश के हस्तक्षेप से जांच में स्थिति साफ हुई और मनोज हलवाई की रिहाई हो सकी।

उठे सवाल: जीप में दस पुलिसकर्मी सवार, फायरिंग में मामूली चोटें

आमतौर पर पुलिस मुठभेड़ सवालों के घेरे में रहती ही हैं। मनोज कश्यप से हुई मुठभेड़ के तरीके को लेकर और हास्यास्पद स्थिति बनी है। पुलिस ने दर्शाया है कि जीप में बैठकर दस पुलिसकर्मी गश्त कर रहे थे। वहीं मौके पर बदमाशों को ललकारने के बाद काफी देर तक ताबड़तोड़ फायरिंग की बात बताई जा रही है। अगर वास्तव में दोनों ओर से इस तरह की फायरिंग हुई तो स्थिति दूसरी होनी चाहिए थी। यहां दरोगा व बदमाश को हमेशा की तरह मामूली घाव ही आए हैं। मुठभेड़ को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि पुलिस इसे बिल्कुल सही कार्रवाई बता रही है।
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