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Raksha Bandhan: प्रेम की डोर से एकता का संदेश..., यहां मुस्लिम भाइयों को राखी बांधती हैं हिंदू बहनें

Mon, 19 Aug 2024 10:49 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली में रक्षाबंधन पर भाई-बहन के स्नेह का बंधन एकता का संदेश भी देता है। यहां कई बहनें अपने मुंहबोले मुस्लिम भाइयों को राखी बांधती हैं। वहीं मुस्लिम बहन भी हिंदू भाई को राखी बांधती है।  
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इसराफील को राखी बांधतीं ज्योति चौहान, पंकज को राखी बांधतीं समयुन खान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हमारा देश विभिन्न संप्रदाय और संस्कृतियों का गुलदस्ता है, जिसकी महक और झलक कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में महसूस होती रहती है। ऐसा ही कुछ अहसास रक्षाबंधन के पर्व पर होता है। हर साल यह पर्व हिंदू-मुस्लिम के भेद को भी मिटाकर सौहार्द का संदेश दे जाता है। भाई-बहन के पवित्र रिश्तों की मिसाल भी पेश करता है। ऐसे ही कुछ रिश्ते बरेली शहर में भी हैं। जो अपने में एक मिसाल हैं।

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इसराफील को राखी बांधती हैं पांच बहनें
सुभाष नगर निवासी इसराफील खान राश्मी की पांच हिंदू मुंह बोली बहनें हैं। सभी उन्हें राखी बांधती हैं। इसराफील ने बताया कि वर्ष 2015 में उनकी मुलाकात पीलीभीत बाइपास निवासी बहन ज्योति चौहान से हुई। घर आना-जाना हुआ तो जल्द ही मुलाकात भाई-बहन के रिश्ते में बदल गई। बहन ज्योति चौहान और बहनोई ओम चौहान हमारे परिवार के हर अच्छे बुरे हालात में मौजूद रहते हैं। इसी तरह मीनाक्षी, सौम्या बिष्ट, रिया महाजन, अपूर्वा त्रिपाठी भी उन्हें राखी बांधती हैं। 

पूर्णिमा की शादी में दानिश ने पूरी कीं भाई से जुड़ी रस्में 
रंगमंच के कलाकार दानिश खान और पूर्णिमा श्री का रिश्ता भी 13-14 साल पुराना है। दानिश पुरानी दोस्त अस्मिता के जरिए पूर्णिमा श्री से मिले। तभी से वो दानिश को भाई और दानिश उन्हें बहन मानने लगे। जब शादी हुई तो दानिश ने भाई से जुड़ी सभी रस्में पूरी कीं। पूर्णिमा श्री भारतीय वायुसेना में लेफ्टिनेंट कमांडर हैं। दानिश का कहना है कि रिश्ते दिलों के होते हैं और दिलों से ही निभाए जाते हैं। इसमें जाति धर्म कोई मायने नहीं रखता। 
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पंकज को हर साल राखी बांधती हैं समयुन
समयुन करीब नौ साल पहले थिएटर के मंच पर मिले पंकज मौर्या और समयुन खान के बीच सगे भाई-बहन से ज्यादा प्रेम है।  समयुन बताती हैं कि उन्होंने जब रंगमंच की शुरुआत की तब थियेटर में रंगकर्मी कटरा चांद खां निवासी पंकज मौर्या से भाई का रिश्ता बना। पंकज भइया हर मुश्किल परिस्थिति में ढाल बनकर खड़े रहे। घर में विवाह हो या कोई अन्य रस्म, उसमें छोटी बहन का दायित्व मैंने ही निभाया। भाई-बहन का यह रिश्ता अब इतना मजबूत है कि कभी टूटेगा नहीं।

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