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बरेली बवाल: हाईकोर्ट ने दो आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से किया इन्कार, पुलिस पर किया था हमला

Tue, 11 Nov 2025 10:36 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज/बरेली

सार

बरेली में 26 सितंबर को बवाल के दौरान कैंट क्षेत्र में पुलिस पर हमला करने के दो आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोकने लगाने से हाईकोर्ट ने इन्कार किया है। दोनों आरोपियों ने मुकदमा रद्द करने और गिरफ्तारी रोक लगाने के लिए याचिका दाखिल की थी। 
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बवाल के दौरान की तस्वीर (26 सितंबर) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा के दो आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दिया। बरेली के कैंट थाना क्षेत्र में 26 सितंबर 2025 को इस्लामिया कॉलेज ग्राउंड पर प्रदर्शन कर जुलूस निकाला गया। कानपुर नगर में आई लव मोहम्मद मामले में की गई कार्रवाई का विरोध किया गया। इस दौरान जुलूस में शामिल लोगों ने विवादित नारा लगाया। पुलिस के रोकने पर भीड़ हमलावर हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने 52 नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। 

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इसी मामले में गौहर खान और शाकिब जमाल खान को भी पुलिस ने आरोपी बनाया। दोनों आरोपियों ने दर्ज मुकदमे को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए याचिका दाखिल की। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याचियों को झूठा फंसाया गया है। याची घटना में शामिल नहीं हैं। शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि आरोपियों पर गंभीर आरोप हैं। दोनों ने न सिर्फ पुलिस पर हमला किया, बल्कि शांति भंग करने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं, इसमें विवेचना की जरूरत है।

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मौलाना तौकीर की ऑनलाइन पेशी आज
शहर में 26 सितंबर को हुए बवाल के आरोपी मौलाना तौकीर रजा की 14 मुकदमों में ऑनलाइन सुनवाई मंगलवार को होगी। फतेहगढ़ जेल में बंद मौलाना की जमानत का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, हाल ही में स्थानीय कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है। 28 अक्तूबर को सीजेएम कोर्ट समेत स्थानीय चार अदालतों में 14 मुकदमों की सुनवाई के दौरान फतेहगढ़ जेल में बंद मौलाना तौकीर की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेशी कराई गई थी। मौलाना के साथ जेल भेजे गए सात अन्य आरोपियों को बरेली जिला जेल से लाकर कोर्ट में पेश किया गया था। सभी की न्यायिक हिरासत 11 नवंबर तक बढ़ाने का आदेश कोर्ट ने दिया है। 

पुलिस ने तर्क दिया है कि मौलाना की जमानत से मुकदमों की विवेचना प्रभावित हो सकती है। छह नवंबर को मौलाना की जमानत अर्जी पर बहस के दौरान उसके पक्ष के वकील ने पुलिस के आरोपों को निराधार बताया था। बढ़ती उम्र, बीमारी व स्वास्थ्य के मद्देनजर मौलाना को जेल से बाहर लाने की जरूरत बताई थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद उनके तर्क खारिज कर दिए थे। 
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