छात्र मनोज कुमार वर्मा का फाइल फोटो
- फोटो : परिजन
बरेली में जानलेवा हीमोफीलिया से पीड़ित एक छात्र ने तमाम तकलीफ सहकर यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा दी। बृहस्पतिवार को घोषित इंटर की परीक्षा 54 फीसदी अंकों से पास की, लेकिन परिणाम देखने से पहले उसकी सांसें थम गई। डॉक्टर बनने की ख्वाहिश भी अधूरी रह गई।
हीमोफीलिया जनकल्याण समिति अध्यक्ष रेखा रानी के मुताबिक पूरनपुर दूधिया खुर्द के गांव धरमपुर निवासी शिक्षक चेतराम वर्मा के बेटे मनोज कुमार वर्मा को 15 अप्रैल को दौरे के साथ उल्टियां हो रही थीं। उन्होंने क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया, लेकिन दो दिन बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। तब संस्था से सहयोग मांगा। बिना देरी किए मंडलीय अस्पताल में पहुंचने के लिए कहा। तीसरे दिन बरेली जिला अस्पताल पहुंचे पर बेहोशी की हालत देख हायर सेंटर केजीएमयू लखनऊ रेफर किया, लेकिन परिजन ने शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया।
तीन दिन तक भर्ती रहने के बावजूद भी जब हालत में सुधार नहीं हुआ तो फिर संस्था से संपर्क किया। उन्हें तत्काल लखनऊ ले जाने का सुझाव दिया गया। हालांकि, अस्पताल के डॉक्टर के परामर्श पर वे दिल्ली एम्स चले गए। वहां पहुंचने पर तत्काल भर्ती करने के लिए बेड नहीं मिला।
बिगड़ चुकी थी हालत, बेअसर रहीं दवाएं
रेखा रानी ने बताया कि सात दिन तक उचित परामर्श और इलाज न मिलने से मनोज की हालत काफी बिगड़ गई थी। एम्स में जगह न मिलने पर दिल्ली के ही एक निजी अस्पताल में बच्चे को भर्ती कराया। तब तक देर हो गई थी। दो दिन दवा, जांच जारी रही पर 23 अप्रैल को दोपहर में ही मनोज की सांसें थम गईं। बताया कि शुक्रवार को पिता ने बेटे का रिजल्ट देखा तो वह पास था, लेकिन वह जिंदगी की जंग हार गया।