फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उपलब्धि: टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपण से जन्मी एक बछिया और चार बछड़े, आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने पाई सफलता

Thu, 26 Mar 2026 05:44 PM IST
Mukesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली के इज्जतनगर स्थित आईवीआरआई में टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपण से एक बछिया और चार बछड़ों का जन्म हुआ है। वैज्ञानिकों ने जुलाई 2025 में ओपीयू आईवीएफ तकनीकी से भ्रूण प्रत्यारोपण किया था। 
विज्ञापन
आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने ओपीयू आईवीएफ तकनीकी से किया था भ्रूण प्रत्यारोपण - फोटो : IVRI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बरेली में आखिरकार सात माह बाद भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपण से चार स्वस्थ बछड़े, एक बछिया का जन्म कराने में सफलता हासिल की है। ओवम पिकअप (ओपीयू) इन विट्रो फर्टीलाइजेशन तकनीक से सफल भ्रूण प्रत्यारोपण किया गया था।

विज्ञापन


यह उपलब्धि आईवीआरआई के पशु प्रजनन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. बृजेश कुमार के नेतृत्व में दैहिकी एवं जलवायु परिवर्तन विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. विक्रांत सिंह चौहान, डॉ. विकास चंद्र और पशुधन उत्पादन प्रबंधन अनुभाग के वैज्ञानिक डॉ. एमके पात्रा का अहम सहयोग रहा। साथ ही, संयुक्त निदेशक शोध डॉ. एसके सिंह और डॉ. मुकेश सिंह, डॉ. एमएच खान, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, डॉ. अनुज चौहान का भी योगदान रहा। ढाई वर्षों में टीम ने साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा भैंस में भी ओपीयू–आईवीएफ तकनीकों का सफल मानकीकरण किया। अल्ट्रासाउंड आधारित ट्रांसवेजाइनल ओसाइट एस्पिरेशन, इन विट्रो भ्रूण उत्पादन, एंब्रियो ट्रांसफर संबंधी सफलता स्वदेशी उच्च स्तरीय पशु नस्लों विकास में अहम है।

डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि पहला बछड़ा 28 फरवरी 2026 को जन्मा गौरी नामक की साहीवाल गाय से जन्मा। क्रमवार मार्च में तीन बछड़े और एक बछिया का जन्म हुआ। आईसीएआर उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) एवं संस्थान निदेशक डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने प्रयास को सराहा है। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने उपलब्धि को पशुधन क्षेत्र के लिए उल्लेखनीय बताया है।

विज्ञापन

स्वदेशी उत्कृष्ट नस्ल के पशुओं का किया गया प्रयोग
वैज्ञानिक के अनुसार उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले जर्मप्लाज्म से बछड़े और बछिया का जन्म हुआ है। दाता साहीवाल गाय प्रतिदिन 12 लीटर से अधिक दूध देती थी और वीर्य भी एक स्वदेशी नस्ल के सांड से लिया गया। जिसकी माता का दुग्ध उत्पादन करीब 3,320 किलो प्रति दुग्धावधि रहा है। चयन का उद्देश्य उत्कृष्ट नस्ल से स्वदेशी नस्लों की उत्पादकता बढ़ाना रहा। 

उन्होंने बताया कि इससे पूर्व वर्ष 2018 में आईवीआरआई ने एंब्रियो ट्रांसफर तकनीक से स्वदेशी गोवंश प्रजनन कार्यक्रम की शुरुआत की थी। चार साल में 30 बछड़ों का जन्म हुआ था। वर्ष 2022-23 में ओपीयू-आईवीएफ तकनीक को अपनाया, जो अधिक प्रभावी और लागत के सापेक्ष व्यावहारिक साबित हुई।
विज्ञापन

साल में एक नहीं करीब 10 से 20 पशु का होगा जन्म
सामान्य प्रजनन प्रक्रिया से गाय, भैंस वर्ष में सिर्फ एक बार ही गर्भधारण कर सकती हैं पर ओपीयू आईवीएफ तकनीक से एक भैंस से साल में करीब दस और गाय के करीब 20 उन्नत नस्ल के पशु का जन्म होगा। बताया कि प्रक्रिया में उच्चतम गुणवत्ता के भ्रूण तैयार होते हैं, जिसे कम दूध देने वाली सेरोगेट मदर गाय-भैंस में प्रत्यारोपित करते हैं।

उन्नत नस्ल के विकास से किसानों को होगा फायदा
किसान या पशुपलाकों के पास उन्नत नस्ल का पशु है तो उसका भ्रूण लैब में तैयार कर सेरोगेट मदर में ट्रांसफर करेंगे। वहीं, उनकी मांग पर लैब में संरक्षित भ्रूण को भी प्रत्यारोपित कर देंगे। इससे उन्नत नस्ल के पशु का जन्म होगा। टेस्ट ट्यूब बेबी के दूध देने की क्षमता भ्रूण देने वाली पशु के सापेक्ष होगी। इससे नस्ल सुधार समेत दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा।


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें