स्वदेशी उत्कृष्ट नस्ल के पशुओं का किया गया प्रयोग
वैज्ञानिक के अनुसार उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले जर्मप्लाज्म से बछड़े और बछिया का जन्म हुआ है। दाता साहीवाल गाय प्रतिदिन 12 लीटर से अधिक दूध देती थी और वीर्य भी एक स्वदेशी नस्ल के सांड से लिया गया। जिसकी माता का दुग्ध उत्पादन करीब 3,320 किलो प्रति दुग्धावधि रहा है। चयन का उद्देश्य उत्कृष्ट नस्ल से स्वदेशी नस्लों की उत्पादकता बढ़ाना रहा।
उन्होंने बताया कि इससे पूर्व वर्ष 2018 में आईवीआरआई ने एंब्रियो ट्रांसफर तकनीक से स्वदेशी गोवंश प्रजनन कार्यक्रम की शुरुआत की थी। चार साल में 30 बछड़ों का जन्म हुआ था। वर्ष 2022-23 में ओपीयू-आईवीएफ तकनीक को अपनाया, जो अधिक प्रभावी और लागत के सापेक्ष व्यावहारिक साबित हुई।
साल में एक नहीं करीब 10 से 20 पशु का होगा जन्म
सामान्य प्रजनन प्रक्रिया से गाय, भैंस वर्ष में सिर्फ एक बार ही गर्भधारण कर सकती हैं पर ओपीयू आईवीएफ तकनीक से एक भैंस से साल में करीब दस और गाय के करीब 20 उन्नत नस्ल के पशु का जन्म होगा। बताया कि प्रक्रिया में उच्चतम गुणवत्ता के भ्रूण तैयार होते हैं, जिसे कम दूध देने वाली सेरोगेट मदर गाय-भैंस में प्रत्यारोपित करते हैं।
उन्नत नस्ल के विकास से किसानों को होगा फायदा
किसान या पशुपलाकों के पास उन्नत नस्ल का पशु है तो उसका भ्रूण लैब में तैयार कर सेरोगेट मदर में ट्रांसफर करेंगे। वहीं, उनकी मांग पर लैब में संरक्षित भ्रूण को भी प्रत्यारोपित कर देंगे। इससे उन्नत नस्ल के पशु का जन्म होगा। टेस्ट ट्यूब बेबी के दूध देने की क्षमता भ्रूण देने वाली पशु के सापेक्ष होगी। इससे नस्ल सुधार समेत दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा।