आतंकी गतिविधियों के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संवेदनशील माने जाने वाले बरेली में भारत-पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा के नक्शों की बरामदगी ने खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। फोटोस्टेट दुकानदार कृष्णा के मुताबिक नक्शा लेकर आए दोनों युवक सेना की जो वर्दी पहने थे उस पर उसने 203 कोर लिखा हुआ पढ़ा था। इस इनपुट के बाद सेना पुलिस और सेना इंटेलीजेंस सक्रिय हो गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जो नक्शे एजेंसियों ने जब्त किए हैं उनमें भारत और पाकिस्तान दोनों के ही सैन्य क्षेत्रों की जानकारी है। एक नक्शे पर भारत के हिस्से पर ‘स्वर्ग’ और पाकिस्तान के हिस्से पर ‘नरक’ लिखा है। बरेली का आतंकी कनेक्शन पहले भी सामने आता रहा है। पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी आईएसआई के एजेंट ईजाज को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। उसके पास से त्रिशूल एयरबेस, कैंट के सैन्य क्षेत्र, जाट रेजिमेंट और गरुड़ डिवीजन के अंदर और बाहर के नक्शे मिले थे। शादी समारोह में वीडियोग्राफी करने के बहाने वह सेना के क्षेत्र में कई वीडियो शूट कर चुका था। पाकिस्तानी जासूस बरेली के शाहबाद में 15 महीनों तक किराये पर अपनी बिहारी पत्नी आरा के साथ रहा था। एसटीएफ की कार्रवाई के बाद स्लिपिंग माड्यूल के नाम भी सामने आए थे।
गरुड़ डिवीजन के नक्शे भी थे मौजूद
एसएसआई कैंट विजय पाल के मुताबिक जो नक्शे देखे गए, उनमें गरुड़ डिवीजन का नक्शा भी था। नक्शों की संख्या 30 से 40 के आस-पास बताई जा रही है। इनकी जांच सेना पुलिस और खुफिया एजेंसियां कर रही है। चर्चा रही कि पुलिस ने एक संदिग्ध युवक को पकड़ा है, लेकिन अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की।
सीसी कैमरों से नहीं मिली मदद
पुलिस ने दुकानदार कृष्णा और उनकी मां से लंबी पूछताछ की है। दोनों युवकों के हुलिया को लेकर पुलिस ने काफी मेहनत की। पुलिस का दावा है कि दोनों युवकों को पकड़ लिया जाएगा। हालांकि जांच में जुटी एजेंसियों को सीसी कैमरों की मदद नहीं मिली है। दुकान पर सीसी कैमरा लगे नहीं थे। बीआई बाजार के चौराहे पर लगे सीसी कैमरा खराब मिले हैं। अब दुकानों पर लगे सीसी कैमरों की जांच कराई जा रही है।
बरेली का आतंकी कनेक्शन
- 1996 में नूरेन अहमद निवासी रतघढ़ थाना गढ़वार बलिया को दूसरे समुदाय के उत्तेजित करने वाले साहित्य के साथ गिरफ्तार किया गया था। जमानत के बाद वर्तमान में उसकी लोकेशन खुफिया एजेंसियों को नेपाल में मिली है।
- 27 नवंबर, 2015 को एसटीएफ मेरठ ने शाहबाद में रहने वाले पाकिस्तानी जासूस इजाज को मेरठ सैन्य क्षेत्र से गिरफ्तार होना दिखाया था। उसने सैन्य क्षेत्रों की जासूसी की थी। वर्तमान में वह मेरठ के जेल में निरुद्ध है।
सैन्य दस्तावेजों के साथ पहले भी पकड़े जा चुके हैं जासूस
प्रेमनगर बानखाना के फिरोज माजिद की 2002 में छावनी क्षेत्र के नक्शों के साथ गिरफ्तारी हुई थी। उसको जेल भेजा गया था। इसके अतिक्ति बदायूं के सहसवान निवासी कामरान साजिद को भी जासूसी के आरोप लगने के बाद पकड़ा गया था। गुलाबनगर के चांद मोहम्मद को 2009 में आतंकवादी पैठ और अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया था। किला की जामा मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद अफरोज को 2006 में सैन्य दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया था। वह वर्तमान में केंद्रीय जेल में सजा काट रहा है। 27 फरवरी 2015 को उसको समय पूर्व रिहा किया गया है।
आतंकी घटनाओं में बरेली के संदिग्धों की हो चुकी है गिरफ्तारी
- अब्दुल खालिक निवासी जोखनपुर, बहेड़ी को 20 जून, 1997 को कानपुर में बम विस्फोट के बाद पकड़ा गया था।
- अक्षरधाम, गुजरात में विस्फोट प्रकरण में क्योलड़िया के बरसिया गांव के शान मियां का नाम सामने आया था।
- शीशगढ़ के जाफरपुर निवासी इरफान बंजारा बैंगलुरू में हुई आतंकी घटना में शामिल था। वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
- शाहगढ़ बरेली का रेहान परवेज सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमले में पकड़ा जा चुका है।
- बारादरी के सहसवानी टोला के असरत अंसारी को 2003 में मुंबई सीरियल ब्लास्ट में पकड़ा जा चुका है। उसको फांसी की सजा सुनाई गई।