जिला अस्पताल के इकलौते हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर वीपी भारद्वाज काम के दबाव से इतना दब गए कि रिटायर होने में वह सुकून महसूस कर रहे हैं। रिटायर होने के बाद उनके कमरे के बाहर एक पर्चा चिपका दिया गया है। इसमें लिखा है ‘अब बस’ डॉक्टर साहब की सरकारी सेवाएं समाप्त हो गई हैं, कृपया कमरा नंबर चार में दिखाएं।
हृदय रोग विभाग में अब तक किसी विशेषज्ञ की तैनाती न हो पाने से वार्ड के मरीज तकलीफ में हैं। यहां रोजाना 50 से 60 मरीजों की ओपीडी डॉक्टर भारद्वाज के नाम थी। वहीं वार्ड में ही करीब दस मरीजों के भर्ती होने की सुविधा भी है। इन्हें भी डॉक्टर भारद्वाज देखते थे। लेकिन अब इन्हें फिजीशियन चिकित्सक देखेंगे। शुक्रवार को स्टॉफ ने डॉ. वीपी भारद्वाज को विदाई दी।
- फिजीशियंस पर भी संकट
कार्डियोलॉजी के मरीज डॉ. एएम अग्रवाल देखेंगे। लेकिन ये खुद रोजाना 50 से 60 मरीज ही देखते हैं। ऐसे में कार्डियोलॉजी के मरीजों का कैसे इलाज करेंगे यह देखने वाला होगा। फिलहाल, एमए अग्रवाल चार दिन के लिए कोर्ट मामले में रुड़की गए हैं। बाकी डॉ. वागीश वैश्य और डॉ. अंशुमान तिवारी रोजाना इमरजेंसी ड्यूटी और ओपीडी में करीब 100 से अधिक मरीज देखते हैं।
‘कार्डियोलॉजिस्ट के लिए लगातार शासन को पत्र भेजा जा रहा है। अभी तक कोई हल नहीं निकला है। फिजीशियन के सहारे ही मरीज रहेंगे।’
डॉ. परवीन जहां, सीएमएस