लखीमपुर खीरी। शहर से सटे गांव सुआगाड़ा में 17 दिन में बुखार से दो महिलाओं की मौत होने से गांव के लोग दहशत में हैं। मंगलवार रात दूसरी महिला की मौत होने के बाद भी बृहस्पतिवार को गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची। इंतजार कर रहे लोगों को मायूस होना पड़ा।
सुआगाड़ा निवासी शत्रोहन की पत्नी गोमती को 20 दिन पहले बुखार आया था। परिजनों ने उन्हें शहर के कई निजी अस्पतालों में दिखाया। सुधार न होने पर परिजन उनको लखनऊ के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। निजी अस्पताल में दो दिन में दो लाख रुपये ले लिए। इसके बावजूद तबीयत नहीं सुधरी तो उन्हें लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
ट्रॉमा सेंटर में 10 दिन तक चले इलाज के बाद गोमती की मंगलवार रात मौत हो गई थी। महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बृहस्पतिवार को टीम भेजने की बात कही थी, लेकिन लोग इंतजार करते रहे और टीम नहीं पहुंची।
गांव में गंदगी की भरमार होने पर अधिकांश लोग बुखार से तप रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। गांव में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। डीपीआरओ विशाल सिंह का कहना है कि गांव में लगातार सफाई कराई जा रही है।
50 से अधिक लोग बुखार की चपेट में
सुआगाड़ा गांव में 50 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं। इसमें कैलाश नाथ, गुड्डी देवी, राजकुमार, मनु, अनिल कुमार, अमित कुमार, पूनम देवी, विनय कुमार आदि करीब 50 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं।
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कई लोग आ चुके मलेरिया की चपेट में
गांव में गंदगी की भरमार होने से संक्रमण काफी फैला है। कई लोग मलेरिया की चपेट में आ चुके है। इसमें आरती देवी, पम्मी की 14 वर्ष की बेटी और उनका 10 वर्ष का बेटा मलेरिया की चपेट में आ चुके है। वहीं कई लोग टाइफाइड सहित अन्य बीमारियों की चपेट में हैं।
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राजापुर गांव का भी बुरा हाल
शहर से सटे राजापुर गांव का भी बुरा हाल है। सफाई के अभाव में गांव में गंदगी का अंबार है। जगह-जगह कूढ़े के ढेर लगे होने के साथ ही नालियों का पानी सड़क व खाली प्लॉटों में भरा रहता है। पिछले दिनों डेंगू से पीड़ित एक किशोर की मौत भी हो गई थी। किशोर की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची थी, लेकिन फिर भी वहां का बुरा हाल है।
जनपद के सभी गांवों में बेहतर साफ-सफाई को लेकर कर्मचारियों को निर्देश जा चुके हैं। अगर किसी गांव में ठीक से सफाई नहीं कराई जा रही है तो उसकी जांच कराकर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विशाल सिंह, डीपीआरओ