सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भमोरा क्षेत्र के मिलक मझारा गांव में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बुधवार को लगाए गए तीसरे निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में मरीजों की भारी भीड़ जुटी। शिविर में 537 मरीजों का उपचार किया गया। 50 से अधिक ग्रामीणों के खून की जांच की गई। बीमारियों से परेशान ग्रामीण मुफ्त में दवा पाकर काफी खुश नजर आए।
यहां जूनियर हाईस्कूल परिसर में आयोजित शिविर सुबह 10 बजे शुरू हुआ। शुरू में ही मरीजों की लंबी लाइन लग गई। बच्चों और महिलाओं की संख्या ज्यादा थी। अमर उजाला फाउंडेशन के इस शिविर में फिजीशियन, चेस्ट फिजिशियन, नेत्र रोग विशेषज्ञ, डेंटिस्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ मौजूद रहे। ब्रांडेड कंपनियों की लगभग सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध थीं। इससे मरीजों को तमाम बीमारियों का बेहतर इलाज मिल सका। अपराह्न करीब तीन बजे कैंप का समापन किया गया।
इनका रहा विशेष सहयोग
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. अंशुमान तिवारी, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वर्षा वार्ष्णेय, ऐरन डेंटल क्लीनिक की डॉ. मीनल ऐरन, भमोरा सीएचसी के मेडिकल आफीसर डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. अरुण दयाल, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. अंशु मिश्रा, डॉ. सबा खान, स्टाफ नर्स बेबी नाज, नेत्र सहायक प्रदीप शर्मा और फार्मासिस्ट खुशाल सिंह का विशेष सहयोग रहा। प्रधान कमलेश के पति वीरपाल ने सभी को बुके और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
त्वचा रोग के मरीज ज्यादा
गांव में गंदगी के कारण वैसे तो ग्रामीण मौसमी बीमारियों से ग्रस्त थे। मगर खुजली, फोड़ा, फुंसी के मरीजों की संख्या ज्यादा रही। सर्दी, जुकाम, खांसी, बलगम मरीज भी काफी थे। बीमारी की प्रमुख वजह थी गंदगी। डॉक्टरों न गंदगी नहीें भी कहा कि सफाई न हुई तो गांव में डायरिया फैल सकता है। प्रधान पति वीरपाल का कहना है कि वह घूरे हटाने के लिए मौखिक रूप से कई बार कह चुके हैं। जल्द ही नोटिस जारी किया जाएगा।
बुजुर्ग खो बैठे आंखों की रोशनी
गांव के बुजुर्गों में बड़ी समस्या नेत्र विकार की मिली। इलाज न मिलने से कई बुजुर्ग ग्रामीणों की आंखों की रोशनी खत्म हो चुकी है। इनमें चूड़ीलाल, बाबूराम, चुन्नीलाल, नेतराम, गेंदनलाल आदि हैं। उनका कहना है कि 40 की उम्र पार होते ही उनकी नजर कमजोर होने लगी थी। इलाज नहीं करा पाए, जिससे आंखें धोखा दे गईं।
महिलाओं में खून की कमी, बच्चे कुपोषित
शिविर में दवा लेने पहुंची करीब 50 महिलाओं में कमजोरी और खून की कमी थी। इन सभी को डॉक्टरों ने इलाज करने के साथ ही सेहत सुधारने के घरेलू उपाय भी बताए। कई बच्चे कुपोषण के शिकार पाए गए, जिन्हें जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।