शीशगढ़/सिरौली। शीशगढ़ का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सिरौली का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद बीमार हैं। शीशगढ़ में चार करोड़ पांच लाख रुपये की लागत से बने सीएचसी का भवन रखरखाव न होने के कारण खंडहर और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है। वहीं, सिरौली में एक लाख की आबादी ब्रिटिश काल के ढांचे पर निर्भर है। दोनों केंद्रों में स्टाफ की कमी होने के कारण आपातकालीन इलाज, प्रसव और मेडिकल कराने के लिए मरीज 15 से 55 किलोमीटर की दूरी तय करके दूसरे केंद्र जाने को लाचार हैं। संवाद
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सीएचसी भवन में दरारें, इर्द-गिर्द उगीं झाड़ियां
शीशगढ़। कस्बे समेत आसपास की एक लाख से अधिक की आबादी को बेहतर इलाज देने के लिए 2018 में सीएचसी बना, जो बदहाल है। चार करोड़ पांच लाख की लागत से तैयार भवन में बुनियादी सुविधाओं और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी है। इस कारण मरीज निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं।
नगर पंचायत अध्यक्ष नीलोफर हुसैन ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, डीएम और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को पत्र भेजकर बेहतर सेवाएं बहाल करने की मांग की है। अध्यक्ष की ओर से भेजे गए पत्र में बताया गया था कि सीएचसी की दीवारों और छतों में दरारें आ चुकी हैं, जिससे हादसे की आशंका है। परिसर में स्वच्छता नहीं है। शौचालय भी गंदगी से पटे होने के चलते अनुपयोगी हो चुके हैं। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था न होने से मरीजों और तीमारदारों को पानी खरीदकर पीना पड़ता है। पत्र में केंद्र में 24 घंटे ओपीडी संचालित करने और रिक्त पदों पर तत्काल स्टाफ की तैनाती की मांग की गई है।
स्टाफ क्वार्टर बने असामाजिक तत्वों का अड्डा - सीएचसी परिसर में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के रहने के लिए बनाई गई आवासीय इमारतें देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो रही हैं। परिसर में एक-एक फुट ऊंची घास उग गई है। कस्बावासी अजरुद्दीन ने सोशल मीडिया पर वायरल किए गए एक वीडियो में दावा किया कि इन खाली पड़े असुरक्षित आवासों में रात में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। यह परिसर नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है। पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई गई थी।
22 से 55 किमी दौड़ने की मजबूरी
केंद्र में मेडिको-लीगल (पुलिस मेडिकल) की सुविधा तक नहीं है। किसी भी विवाद या दुर्घटना में घायलों को मेडिकल परीक्षण के लिए 22 किमी दूर बहेड़ी या 55 किमी दूर बरेली निजी वाहनों से जाना पड़ता है। - वसीम अकरम, स्थानीय
स्वास्थ्य सेवाएं न मिलने से मरीजों को बरेली में जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, जिससे समय और रुपये दोनों बर्बाद होते हैं। - रामप्रकाश गुप्ता, स्थानीय
करोड़ों रुपये से बना केंद्र, क्षेत्रवासियों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है, जहां इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूरी की जा रही है। - जलीस अहमद
वर्जन,
शिकायत मिली है। सुधार कराया जाएगा। सीएचसी में सफाई करवा दी गई है। जेई को भेजकर परिसर की मरम्मत के लिए प्लान बनवाया जाएगा। - विश्राम सिंह, सीएमओ
थाना प्रभारी को शनिवार को पत्र भेजेंगे, जिससे परिसर से असामाजिक तत्वों को हटाया जा सके। - गजेंद्र सिंह, सीएचसी प्रभारी
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स्टाफ का कमी, सेवाएं बदहाल
सिरौली। जिला मुख्यालय से 70-75 किलोमीटर दूर रामपुर सीमा पर स्थित सिरौली नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से स्टाफ की कमी है। इसमें कस्बे सहित आसपास के कई गांवों की करीब एक लाख की आबादी को सरकारी चिकित्सा सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
16 के बजाय केवल दो कर्मी संभाल रहे स्वास्थ्य व्यवस्था - चिकित्सकों के मुताबिक, विभागीय नियमावली और मानकों के अनुसार इस श्रेणी के स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टर, एक महिला डॉक्टर, एक स्टाफ नर्स, चार एएनएम, फार्मासिस्ट, लैब टेकनीशियन, लैब सहायक, काउंसलर, वार्ड बॉय और सफाई कर्मी समेत 16 लोगों का स्टाफ तैनात होना अनिवार्य है। हालांकि, वर्तमान में इस केंद्र में केवल एक नियमित डॉक्टर और एक संविदा वार्ड बॉय ही कार्यरत हैं। सीमित स्टाफ के कारण रात में अस्पताल में किसी भी प्रकार की आपातकालीन सेवा उपलब्ध नहीं हो पाती है। प्रसव की व्यवस्था और महिला चिकित्सक न होने के कारण गरीब परिवार निजी अस्पतालों में जेब ढीली करने को मजबूर हैं।
आबादी बढ़ी पर ढांचा नहीं बदला - क्षेत्रवासियों के मुताबिक, इस केंद्र की स्थापना ब्रिटिश काल में हुई थी, जब कस्बे की आबादी 10 हजार के आसपास थी। अब कस्बे की ही आबादी 50 हजार के पार है और आसपास के ग्रामीण इलाकों को मिलाकर यह संख्या एक लाख से अधिक है। इसके बावजूद इसको अबतक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपग्रेड नहीं किया गया है।
मेडिकल के लिए 15 किमी की दौड़ - मारपीट या दुर्घटना में घायलों के मेडिकल की सुविधा इस केंद्र में नहीं मिलती है। घायलों को 15 किलोमीटर दूर रामनगर ले जाना पड़ता है, जिससे आपातकालीन स्थिति में समय-रुपये का नुकसान होता है।
सफाई कर्मी तक की नियुक्ति नहीं - परिसर के लिए लंबे समय से किसी स्थायी सफाई कर्मी की नियुक्ति नहीं की गई है। अस्पताल प्रबंधन को परिसर की सफाई के लिए नगर पंचायत के सफाई कर्मियों पर निर्भर रहना पड़ता है। सफाई व्यवस्था नियमित न होने के कारण परिसर में गंदगी पसरी है।
वर्जन,
अस्पताल में स्टाफ की कमी का मामला मेरे संज्ञान में है। मैंने स्वयं इस अस्पताल का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया था। विभाग में नया स्टाफ आते ही सिरौली में रिक्त पदों को भरा जाएगा, ताकि क्षेत्रीय मरीजों को उचित इलाज मिल सके। - विश्राम सिंह, सीएमओ