बीमारी के चलते संतोषनगर कॉलोनी निवासी तीन सगे भाइयों की 24 घंटे के अंदर मौत हो गई। एक ने घर पर और दो भाइयों ने निजी अस्पताल में दम तोड़ा। खास यह कि जिस अस्पताल में इनका इलाज चल रहा था, वह पंजीकृत नहीं है। सीएमओ ने टीम भेजकर अस्पताल को सील करा दिया पर वहां तीन गंभीर मरीज भर्ती होने के कारण ताला नहीं डाला। मृतकों की कोरोना जांच नहीं हुई थी।
मृतक अतुल अग्रवाल (35) डायबिटीज के मरीज थे, उनकी मौत शुक्रवार रात घर पर हुई। सुशील (52) और अनिल (50) किसी अनुवांशिक बीमारी से ग्रसित थे। इनकी मौत राजापुर स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार सुबह हुई। मृतकों की कोरोना जांच नहीं हुई थी। ऐसे में संक्रमण की आशंका के चलते परिवार वालों ने भी शव लेने से इनकार कर दिया।
अस्पताल के मालिक ने अंतिम संस्कार किया। अस्पताल सील करने के लिए एसीएमओ डॉ आरपी दीक्षित, नायब तहसीलदार ओपी मिश्रा और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। दो घंटे तक अस्पताल प्रशासन और एसीएमओ में वार्ता का दौर चलता रहा। उसके बाद टीम वहां भर्ती तीन गंभीर मरीजों की हालत गंभीर बताते हुए बिना ताले डाले लौट आई।
तीन भाइयों की मौत से परिवार वाले बेहाल
लखीमपुर खीरी। 24 घंटों में परिवार के तीन सदस्यों की मौत से परिजन बेहाल हैं। घर में दो महिलाएं और दो बच्चे हैं जो किसी से बात करने से बच रहे हैं। मृतक तीन भाइयों में किसी की कोरोना जांच नहीं हुई थी। इधर परिवार वालों के अंतिम संस्कार न करने पर अस्पताल प्रबंधन ने अंतिम संस्कार कराया।
शिखर अस्पताल में तीन मरीज बेहद गंभीर हालत में भर्ती थे, जिनकी हालत इतनी गंभीर थी कि जिला अस्पताल में लाकर भर्ती कराना मुश्किल था, इसलिए ताला नहीं डाला गया है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों की देखरेख में उनका वहीं इलाज होगा। सीजर प्रक्रिया पर नायाब तहसीलदार ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। मरीज ठीक होने के बाद अस्पताल में ताला डलवा दिया जाएगा।
-डॉ मनोज अग्रवाल, सीएमओ
शिखर हॉस्पिटल में तीन मरीज गंभीर हालत में भर्ती थे, जिन्हें अस्पताल से टीम बुलाकर दिखवाया गया था। इस स्थिति में तीनों मरीजों को शिफ्ट करने का मतलब रिस्क लेना था। मरीजों के स्वस्थ होते ही अस्पताल पर ताला डाल दिया जाएगा।
-डॉ आरपी दीक्षित, एसीएमओ
कई दिन से तीनों भाई बीमार थे, जिसमे से दो लोगों को शुक्रवार रात में अस्पताल लाया गया था। हालत बेहद गंभीर होने पर ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने जिला अस्पताल ले जाने को कहा, लेकिन घर का कोई सदस्य साथ न होने के कारण मजबूरन भर्ती करना पड़ा। इलाज के दौरान एक की रात में तो दूसरे भाई की सुबह मौत हो गई। उनके घर मे सिर्फ महिलाएं थी, जिनके कहने पर मानवीय पहलू अपनाते हुए शवों का अंतिम संस्कार भी करवा दिया। रही बात पंजीकरण की तो आवेदन किए हुए एक माह से अधिक समय हो गया है, करीब 15 दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम निरीक्षण भी कर चुकी है। मगर, नंबर अब तक नहीं मिला है।
-रमेश अग्रवाल, प्रबंधक, शिखर अस्पताल