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शिकायत से जांच के घेरे में आए सीएमओ व स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारी

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बदायूं। इस कोरोना संक्रमण काल में देश-प्रदेश के लोगों, कंपनियों और कई संस्थाओं की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई। सैकड़ों कंपनियां बंद होने के कगार पर पहुंच गईं। कर्मंचारियों की छंटनी तक कर दी गई तो वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की अर्थव्यवस्था सुधर गई। सीएमओ के खिलाफ की गई शिकायत में कई ऐसे बिंदु उठाए हैं, जो वास्तव में उन्हें कार्रवाई के घेरे में ला रहे हैं। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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शहर के सुमित सिंह ने मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को भेजी शिकायत में सीएमओ व अन्य कई विभागीय कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग कई वर्षों से जैम पोर्टल पर खरीदारी का ब्योरा स्टोर कर रहा था, लेकिन तत्काल खरीदारी के लिए दूसरी आईडी बनाई गई। विभाग द्वारा लगातार आगरा की फर्म द्वारा खरीदारी की गई। इसी फर्म का स्पेशिफिकेशन डलवाया गया और किसी फर्म का स्पेशिफिकेशन डलवाया ही नहीं गया। सीएमओ डॉ. यशपाल सिंह इससे पहले आगरा में प्रतिरक्षण अधिकारी रह चुके हैं। वहां भी उनके द्वारा घोटाले किए गए हैं। वहीं फेसमास्क खरीद में अलग-अलग तारीखों में मूल्यों में भी अंतर दिखाया गया है। इसके अलावा अवनि परिधि कंपनी से निकाले गए कर्मचारियों के बारे में भी सवाल उठे हैं। कहा जा रहा है कि जिन कर्मचारियों की सेटिंग नहीं हुई थी, उनमें एक ही पद के कर्मचारी बाहर कर दिए गए। वर्ष 2019-20 में शासन से 77 लाख रुपये आशाओं की प्रोत्साहन राशि आई थी, लेकिन आठ ब्लॉक क्षेत्रों में ये राशि दी ही नहीं गई। इसमें भी आरोप लगा है कि जिन लोगों ने कमीशन दी, उन्हें ही राशि दी गई। सबसे ज्यादा टेंडर देने में आरोप लग रहे हैं। सीएमओ पर ये भी आरोप लगा है कि लॉंड्री और डाइट का टेंडर उन्होंने अपने भांजे को दिया है। बताया जा रहा है कि इसमें सीडीओ का नाम भी शिकायत में शामिल है। डीएम कुमार प्रशांत के अनुसार इस मामले की जांच एडी हेल्थ कर रहे हैं।
-सीएमओ के खिलाफ कई शिकायतें आईं हैं। ये शासन को भी भेजी गवईं नहैं। उन पर टेंडर से लेकर मास्क खरीद आदि के आरोप हैं। इसकी जांच एडी हेल्थ कर रहे हैं। इसमें सीडीओ का भी नाम सामने आया है। एडी हेल्थ इसकी जांच कर ही रहे हैं। अगर सीडीओ उसमें शामिल पाई जाती हैं। तो ये जांच अलग कराई जाएगी।
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कुमार प्रशांत, डीएम
-पहले कोविड के चक्कर में टेंडर नहीं हो रहे थे। अब डीएम के निर्देशन में टेंडर हो रहे हैं। टेंडर भी कार्य का एक अंग है। शासन को आशाओं की जो प्रोत्साहन राशि वापस हुई है, ये लिपिक की गलत रही। हम इसके बारे में पहले ही लिखकर दे चुके हैं। इसके अलावा भांजे को टेंडर देने की बात कहां से आई, हमें नहीं पता। हमारे तो कोई बहन ही नहीं है। अब जो जांच चल रही है, उसमें जो फैसला सामने आएगा। हम उसे मानने को तैयार हैं।
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डॉ. यशपाल सिंह, सीएमओ
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