डेढ़ लाख लोगों के मोबाइल पर फोन करके फीडबैक लेगी एजेंसी
बृहस्पतिवार को दिन भी डाटा अपलोड करने में जुटे रहे अफसर
बरेली। बदहाल व्यवस्थाओं के बीच चार जनवरी से स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 शुरू हो रहा है। ऑनलाइन फीडबैक के लिए नगर निगम ने डेढ़ लाख से ज्यादा नागरिकों के मोबाइल नंबर सर्वे करने वाली एजेंसी को उपलब्ध कराए हैं। साथ ही अन्य जरूरी डाटा भी बृहस्पतिवार को स्वच्छता सर्वेक्षण की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। भारत सरकार की ओर से कराए जा रहे इस सर्वेक्षण को लेकर नगर निगम से सफाई के संसाधन, वार्डों की संख्या और कर्मचारियों आदि का डाटा मांगा गया था।
निगम के स्वास्थ्य अधिकारी संजीव प्रधान ने बताया कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 शुरू कराने से पूर्व भारत सरकार की ओर से मांगी गई सभी जानकारियां और जरूरी आंकड़े बृहस्पतिवार शाम को ही ऑनलाइन अपलोड कर दिए गए हैं। हालांकि इसका समय शुक्रवार तक था लेकिन सर्वेर पर लोड को देखते हुए यह काम बृहस्पतिवार को ही खत्म कर लिया गया है। बताया कि पिछले साल 4000 अंकों के सर्वे में नगर निगम को 117वीं रैंक मिली थी। मगर इस बार सर्वेक्षण 6000 अंकों का होगा और इसके आधार पर ही नगर निगम के कई प्रोजेक्टों को केंद्र सरकार से मंजूरी मिलेगी।
ऐप के माध्यम से होगा 6000 अंकों का सर्वेक्षण
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने इस बार 6000 अंकों के पांचवें वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 (एसएस 2020)’ की शुरुआत की है। इसके तहत एसबीएम वॉटर प्लस प्रोटोकॉल एवं टूलकिट, स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 टूलकिट, स्वच्छ नगर ऐप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्त एमएसबीएम ऐप लांच किया है।
सर्वेक्षण के बिंदु और निगम की स्थिति
1- अलग-अलग कचरा जमा करना और प्रोसेसिंग स्थल तक उसे बनाए रखना : फिलहाल नगर निगम में इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। सिर्फ 20 वार्ड में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन शुरू हुआ है। गीला-सूखा कूड़ा अलग करने और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था पूरी तरह फेल है।
2- गीले कचरे का प्रसंस्करण सुविधा और उपयोग : नगर निगम ने अभी तक इसकी भी कोई व्यवस्था नहीं की हैै। गीले कूड़े के लिए कंपोस्ट पिट बनाने की योजना भी अधर में है।
3- गंदे पानी की सफाई और उपयोग : निगम क्षेत्र में अब तक कोई एसटीपी नहीं बना है और गंदा पानी रामगंगा में जा रहा है। एक एसटीपी निर्माणाधीन है और चार अन्य के लिए जमीन की तलाश चल रही है।
4- कूड़े को कम करना और उसका उपयोग : निगम ने अभी सिर्फ 20 वार्ड में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन शुरू किया है। इसको कम करने या उपयोग की दिशा में कोई कार्य नहीं हो रहा है।
5- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट : नगर निगम का रजऊ परसपुर स्थित प्लांट बंद है, दूसरी जगह फिलहाल जमीन नहीं मिल सकी है। बाकरगंज में लगा प्लांट नगर निगम की राजनीति में फंस गया है।
6- अनौपचारिक कचरा बीनने वालों की सामाजिक स्थिति बेहतर करना : इस दिशा में नगर निगम ने अभी कोई कार्य शुरू नहीं किया है। पिछले दिनों कबाड़ वालों के साथ एक मीटिंग करने के बाद सारी कवायद ठप हो गई।
7- ग्लोबल एंटरप्रेन्योरशिप मॉनीटर : इसकी मॉनीटरिंग के साथ नगर निगम को अपनी प्राप्तियों को बढ़ावा देना है। मगर इस दिशा में भी अब तक कोई काम नहीं हुआ है।