तीन अति कुपोषित भाई-बहन एनआरसी में भर्ती
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
माता-पिता बोले- पिछले छह सालों से गांव में योजनाओं की जानकारी देने कोई नहीं पहुंचा
बरेली। करोड़ों के बजट से अतिकुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने के बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं। साल दर साल कागजों में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या तेजी से तो घटती जा रही है, लेकिन असल तस्वीर उसके उलट है। सोमवार को अतिकुपोषित तीन बच्चों को साथ लेकर जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचे एक दंपती ने बताया कि पिछले छह सालों में उनके गांव योजनाओं की जानकारी देने आशा या आंगनबाड़ी वर्कर नहीं पहुंची। कोई पोस्टर या पंफलेट तक गांव में नहीं लगाया गया। बच्चों की हालत गंभीर देख उन्हें एनआरसी रेफर किया गया है।
सोमवार को सीएचसी बहेड़ी से रेफर मंडनपुर के रहने वाले इम्तियाज अपने तीनों अतिकुपोषित बच्चे आशिया (4), निखत (2), हसन (1) को लेकर एनआरसी पर पहुंचे थे। यह पहली बार हुआ है कि एनआरसी पर एक ही परिवार के सभी अतिकुपोषित बच्चे भर्ती हुए हों। इम्तियाज ने बताया कि गांव मंडनपुर में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने अभी तक कोई नहीं पहुंचा है। आंगनबाड़ी हों या आशा वर्कर, गांव में कभी आती ही नहीं हैं। गरीबी के चलते वह मां और बच्चों का पूरा पोषण भी नहीं दे पा रहे थे। बताया कि लंबे समय से बच्चों की तबियत खराब चल रही थी। उल्टी, दस्त, स्क्रेबीज समेत बेहोशी जैसी छाने लगी थी। गांव के एक मेडिकल स्टोर से दवाएं देते रहे, लेकिन पिछले करीब दस दिन से तबियत ज्यादा खराब हुई तो सीएचसी पहुंचे। वहां पर जांच के बाद डॉक्टर ने सभी बच्चों को अतिकुपोषित बताकर एनआरसी रेफर कर दिया। यहां डॉ. रोजी जैदी ने अतिकुपोषित बच्चे के मानकों की जांच के बाद सभी को भर्ती कर उपचार मुहैया शुरू कर दिया है।