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आयुष्मान कार्ड रिजेक्ट बताकर नहीं किया इलाज, मौत

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बरेली। सुभाष नगर क्षेत्र के नेकपुर मढ़ीनाथन निवासी 45 वर्षीय एक व्यक्ति को पैरालिसिस का अटैक पड़ा। उसकी बेटी उसे जिला अस्पताल ले गयी। यहां इमरजेंसी में भर्ती कर उसे प्राथमिक इलाज दिया गया, लेकिन न्यूरो विशेषज्ञ न होने के कारण बेटी ने पिता को एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। वहां नौ दिन भर्ती रखने के बाद यह कहकर इलाज करने से मना कर दिया कि उसका आयुष्मान कार्ड खराब है। पैसे न होने से बेटी पिता को घर ले आई और दो दिसंबर को उनकी मौत हो गयी। मृतक की बेटी ने सीएम को पत्र लिखकर कहा है कि उसे नौकरी चाहिए, ताकि वो अपने भाई-बहनों को पाल सके।
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शिखा ने बताया कि उसके पिता कन्हई लाल को पैरालिसिस का अटैक पड़ा। जिला अस्पताल में तीन नवंबर तक वह भर्ती रहे। लेकिन न्यूरो विशेषज्ञ न होने के कारण उसने पिता को भोजीपुरा के एक प्राइवेट हास्पिटल में भर्ती कराया। शिखा ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान कार्ड होने के बाद पहले दिन उससे करीब छह हजार रुपये लिए। इसके बाद 13 नवंबर तक इलाज किया और फिर कहा कि आपका कार्ड खराब है। इस पर इलाज नहीं हो पाएगा। इलाज कराना है तो पैसे जमा करो। पैसे न होने के कारण शिखा अपने पिता को घर ले आयी। इसके बाद उसने सीएम पोर्टल पर भी शिकायत की, लेकिन मदद नहीं मिली। सोमवार दोपहर उसके पिता की मौत हो गयी।
शिखा ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया है। कहा कि उसे कहीं कोेई जांच और कार्रवाई नहीं चाहिए। उसे नौकरी चाहिए, जिससे वह अपने छोटे भाई बहनों को पाल सके। शिखा ने बताया कि वह चार भाई बहन है। उसकी छोटी बहन संध्या 17 वर्ष, भाई अमन 16 और खुशी 13 वर्ष की है। पिता ऑटो चलाते थे। इसके अलावा उसके पास आय के स्त्रोत का कोई साधन नहीं है। सीएमओ डॉ. विनीत कुमार शुक्ल का कहना है कि उन्हें लिखित शिकायत दी जाए। यदि आयुष्मान कार्ड सही है और उसे रिजेक्ट बताया गया है तो अस्पताल पर कार्रवाई की जाएगी।
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