बरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के डॉक्टरों को संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाने और रोगियों से शालीन व्यवहार की हिदायत देने के बावजूद सरकारी अस्पताल आए दिन लापरवाही और संवदेनहीनता के लिए चर्चा में रहते हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल में एक महिला पेट में तेज दर्द से इमरजेंसी के बाहर तीन घंटे तक फर्श पर पड़ी तड़पती रही, लेकिन डॉक्टरों ने उसे भर्ती नहीं किया। इमरजेंसी में तैनात एक डॉक्टर ने तो यह तक कह दिया कि इसे कोई दर्द नहीं है, ड्रामा कर रही है। वहां मौजूद लोगों ने हंगामा करते हुए सीएमएस से शिकायत की तब कहीं उसे भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। महिला को बारादरी थाना पुलिस मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल लेकर आई थी।
शहर के मोहल्ला एजाज नगर गौंटिया की नगीना के साथ रविवार को उसके पति मोहम्मद अयूब ने मारपीट की थी। नगीना ने बारादरी थाने में तहरीर दी। बताया कि पति ने पेट में लात-घूंसे मारे हैं। चाकू की मूठ से भी पेट पर कई प्रहार किए। इससे उसे पेट में तेज दर्द हो रहा हैै। पुलिस ने उसे महिला होमगार्ड के साथ मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेजा। यहां होमगार्ड ने उसका एक्स-रे कराया। पेट में तेज दर्द होने पर नगीना करीब तीन घंटे तक इमरजेंसी के बाहर फर्श पर पड़ी दर्द से चीखती रही। इस दौरान कई डॉक्टर उसके पास से गुजरे लेकिन किसी ने उसे भर्ती नहीं किया। नगीना के साथ मौजूद उसकी सास नईमा भी इलाज के लिए डॉक्टरों से गुहार लगाती रहीं लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। इमरजेंसी में मौजूद एक डॉक्टर ने उसे देखे बिना ही कह दिया कि इसे कोई दर्द नहीं है, पति पर कार्रवाई के लिए ड्रामा कर रही है। इस बीच वहां भीड़ लग गई। लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। सीएमएस डॉ. टीएस आर्या से भी शिकायत की, इसके बाद नगीना को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। सीएमएस का कहना है कि महिला का इलाज न होने की उन्हें जानकारी मिली थी। उन्हाेंने उसे तत्काल भर्ती कराके इलाज शुरू करा दिया। यदि कोई लापरवाही हुई है तो मामले की जांच कराई जाएगी।