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लापरवाहीः दुधमुंहे की जांघ में डेढ़ इंच की सुई तोड़ दी

Mon, 18 Nov 2019 06:49 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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दर्द से कराहता बच्चा - फोटो : अमर उजाला
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शहर के एक निजी अस्पताल में तीन माह के बच्चे का ब्लड सैंपल लेते समय मेडिकल स्टाफ की लापरवाही से बच्चे की जांघ में डेढ़ इंच लंबी सुई टूट गई। बच्चा दर्द से चीखा, लेकिन स्टाफ ने ध्यान ही नहीं दिया और कपड़े पहनाकर बच्चे को मां-बाप के हवाले कर दिया। बच्चा लगातार दर्द के मारे रो रहा था, लेकिन दंपती उसके रोने कारण नहीं समझ पाए। 

करीब तीन घंटे बाद जब मां ने डायपर बदला तो उसकीजांघ में सुई धंसी देखी। काफी मशक्कत के बाद दंपती ने सुई को बाहर निकाला। इसके बाद अस्पताल पहुंचकर प्रबंधन से इसकी शिकायत की तो पहले तो दंपती को धमकाया गया। फिर इलाज का खर्च छोड़ देने की बात भी कही गई। करीब दो घंटे तक दंपती को अस्पताल में बैठाए रखा गया। दंपती जब समझौते को तैयार नहीं हुए तो उन्हें अस्पताल से जाने को कह दिया गया।
शहर के मोहल्ला संजयनगर, रजत बिहार निवासी सचिन शर्मा और हेमलता के तीन माह के बेटे लव्यांश को कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। दंपती ने मोहल्ला राजेंद्रनगर में झूलेलाल गेट के आगे बच्चों के अस्पताल में लव्यांश को दिखाया। एक सप्ताह इलाज के बाद भी बच्चे की तबीयत ठीक नहीं हुई तो रविवार दोपहर डॉक्टर ने ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दी।
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अस्पताल के बेसमेंट में स्थित लैब में दंपती बच्चे को लेकर पहुंचे। वहां तैनात दो कर्मियों ने ब्लड सैंपल लेने के लिए उनसे बच्चे को ले लिया। दंपती ने अंदर जाना चाहा तो उन्होंने यह कहकर रोक दिया कि अंदर किसी को आने की इजाजत नहीं है। करीब 10 मिनट बाद दोनों कर्मी बच्चे को लेकर बाहर आए तो बच्चा रो रहा था। बताया कि ब्लड लेने की वजह रो रहा है।

इसके बाद दंपती ने अस्पताल में ही चार बजे तक रिपोर्ट आने का इंतजार किया। रिपोर्ट मिलने के बाद डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाकर घर चले गए। हेमलता ने बताया कि सैंपल लेने के बाद से ही बच्चा चीखे जा रहा था। घर आने के बाद भी बच्चा चुप नहीं हुआ। करीब साढ़े पांच बजे जब वह उसका डायपर बदल रही थीं तो उसकी जांघ में फंसी टूटी सुई उनके हाथ में चुभी। वहां से खून भी निकल रहा था। दंपती ने सुई के आसपास की खाल को दबाया तो सुई कुछ ऊपर आई। तब उसे खींचकर बाहर निकाला।
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इसके बाद दंपती इसकी शिकायत करने अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर लैब कर्मियों की गलती मानने के बजाय दंपती को कहीं शिकायत न करने को कहा। दंपती लैब कर्मियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। अस्पताल प्रबंधन कार्रवाई को तैयार नहीं हुआ तो दंपती लौट आए। दंपती ने बताया कि सोमवार को वह इसकी डीएम और सीएमओ से शिकायत करेंगे।

दंपती को देते रहे प्रलोभन

दंपती अस्पताल प्रबंधन से कार्रवाई की मांग कर रहे थे तो दूसरी तरफ अस्पताल प्रबंधन की ओर से दो डॉक्टर उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन दिए जा रहे थे। वे ओपीडी फ्री करने से लेकर बच्चे के इलाज का अब तक का खर्चा माफ करने को तैयार थे।

बहुत पुरानी सुई का हुआ इस्तेमाल

जो सुई बच्चे की जांघ में धंसी दिख रही है। उसे पहली बार तो देखने में लग रहा है कि बहुत पुराने समय की सुई इस्तेमाल की गई है। क्योंकि ब्लड में तीन-चार घंटे धंसे रहने के बाद भी सुई का रंग नहीं बदलता है, लेकिन जो सुई दिख रही है यह हल्की काली पड़ गई है। यह सिर्फ बहुत पुराने समय की सुई में ही हो सकता है। इसके अलावा सुई जहां से टूटी हुई है, वहां एक सफेद रंग की विंग होती है, जिसमे प्लास्टिक होती है जो सुई को टूटने नहीं देती है। इसमें वो विंग भी गायब है। 
-डॉ. अतुल अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ।

डॉ. अतुल अग्रवाल ने बताया कि काफी समय से चिकित्सा क्षेत्र में जो सुई इस्तेमाल हो रही हैं उनके टूटने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। वह अलग ही मैटेरियल से बनी होती है। मुड़ जाएगी लेकिन टूटेगी नहीं। बल्कि उसे काटने के लिए भी एक विशेष ब्लेड का इस्तेमाल करना पड़ता है। 
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