वायु प्रदूषण से जूझ रहे शहरवालों के लिए पानी ने भी मुसीबत खड़ी कर दी है। दिल्ली समेत 21 बड़े शहरों का पानी तो शुद्धता के 48 मानकों पर फेल हो ही चुका है, बरेली में भी अब स्थिति बिगड़ने लगी है। शहर के भूमिगत जल में सौ फीट से ज्यादा गहराई में खतरनाक बैक्टीरिया ई-कोलाई पाया गया है। इसके अलावा हैवी मेटल भी बढ़ रहे हैं, जो कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का कारण बन रहे हैं। नदियों के पानी से ऑक्सीजन भी खत्म हो रही है।
बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग और यूनीसेफ ने पिछले दिनों ग्राउंड वाटर क्वालिटी एनालिसिस प्रोजेक्ट के तहत बरेली और मुरादाबाद में 200 सैंपल की जांच की। इसमें हैवी मेटल के साथ ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला। यह बैक्टीरिया सीवर के जरिए पानी से पहुंचता है। बरेली में पुराना शहर, रामपुर गार्डन, बाकरगंज समेत 80 जगहों के सैंपल लिए गए, जिसमें यह बैक्टीरिया पाया गया है। बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग के हेड डॉ. आलोक खरे के अनुसार ये सैंपल 100 से 120 फीट गहरे नलों से लिए गए थे। उन्होंने बताया कि सीवर का पानी भूमिगत जल में पहुंचने से यह बैक्टीरिया फैल रहा है।
नदियों के पानी से खत्म हो रही ऑक्सीजन
राम गंगा, नकटिया नदी, किला नदी समेत बरेली की कई नदियों के पानी के सैंपल की भी जांच की गई। जिसमें ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम मिली। डिजॉल्व ऑक्सीजन (डीओ) की सामान्य स्थिति 50 एमजी प्रति लीटर होनी चाहिए, जबकि इसकी स्थिति 4-5 एमजी प्रति लीटर मिली। बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की सामान्य स्थिति 5 एमजी प्रति लीटर होनी चाहिए, जबकि इसकी स्थिति 500-600 एमजी प्रति लीटर मिली। टोटल डिजॉल्व सॉलिड (टीडीएस) यानी पानी में पाए जाने वाले एक तरह के खनिज लवण, मिनरल इसकी सामान्य मात्रा 150 एमजी प्रति लीटर होनी चाहिए, जबकि इसकी स्थिति 240-350 एमजी प्रति लीटर से ऊपर मिली।
जुल्फें जवां करने के चक्कर में पानी में पहुंचा रहे हैवी मेटल
हेयर डाई में सबसे खतरनाक केमिकल कंपाउंड निकलते हैं, जो कैंसर और त्वचा संबंधी कई गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। शहर में हेयर डाई और कपड़ों को रंगने के लिए उपयोग की जाने वाली डाई का पानी सीधे नालों में छोड़ दिया जाता है, जो भूमिगत जल में मिल रहा है। डॉ. आलोक खरे के अनुसार डाई से डाई अमीनो नाइट्रेट फिनायल, डाई क्लोरो नाइट्रो फिनायल, नाइट्रो फिनायल जैसे केमिकल कंपाउंड निकलते हैं। यह पानी में पहुंचकर बहुत जल्दी रिएक्शन करता है। इस कंपाउंड को आसानी से तोड़ा भी नहीं जा सकता। इसे रोकना है तो नाले में डाई का पानी जाने से रोकना होगा।
बैक्टीरिया पेट संबंधी बीमारियों का कारण
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य के अनुसार पेट और त्वचा संबंधी बीमारियों का कारण दूषित जल भी बनता है। साफ पानी पीने से कई तरह की बीमारियों से निजात मिल जाती है। अगर बैक्टीरिया और हैवी मेटल वाले पानी का उपयोग कर रहे हैं तो कैंसर जैसी बीमारी का कारण भी बन सकता है। अगर घर में आरो नहीं है तो पानी उबालकर पीयें।
अगर पानी में ई-कोलाई तो सेवन खतरनाक
जिला अस्पताल में फिजिशियन डॉ. अजय मोहन के अनुसार पेयजल की शुद्धता मापने के लिए ई-कोलाई बैक्टीरिया ही देखा जाता है। अगर पानी में यह मिला तो कई अन्य खतरनाक बैक्टीरिया होने की आशंका बढ़ जाती है। आंतों में इंफेक्शन हो सकता है, जिससे उल्टी दस्त की समस्या हो सकती है। यह बैक्टीरिया इंसानों के मल से फैलता है।
कोलाईक्या है ई-
ई-कोलाई इशचेरिचिया कोलाई का संक्षिप्त रूप है। यह एक तरह का बैक्टीरिया है, जो इंसानों और पशुओं के पेट में हमेशा रहता है। अगर मल पानी में पहुंच रहा तो यह बैक्टीरिया पानी में फैल जाएगा। अगर ई-कोलाई बैैक्टीरिया मिल रहा है तो सलमोनेला बैक्टीरिया होने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे टाइफाइड होता है।
क्या है नुकसान
ई-कोलाई से गुर्दे और स्नायुतंत्र बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। इस अवस्था को हिमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम कहते हैं। इस संक्रमण से खूनी दस्त, गुर्दे फेल होना, मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं।
मौसम साफ होने से कम हो रहा वायु प्रदूषण
पिछले कुछ दिन से मौसम साफ है, जिससे वायु प्रदूषण का ग्राफ कम हो रहा है। पार्टीकुलेट मैटर (पीएम-2.5 और पीएम-10) की स्थिति सुधरी है, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक की स्थिति भी बेहतर हुई। शनिवार को पीएम-2.5 80 से 90 के बीच था और पीएम- 10 197 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर था। रविवार को इसकी स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ। पर्यावरणविद डॉ. डीके सक्सेना के अनुसार मौसम साफ हो रहा है और हवा भी चल रही है जिससे प्रदूषण का ग्राफ कम हुआ है। रविवार को शनिवार के मुकाबले मौसम थोड़ा ठंडा रहा। शनिवार को अधिकतम तापमान 28.9 व न्यूनतम 14.9 रिकॉर्ड किया गया जबकि रविवार को अधिकतम तापमान 28 व न्यूनतम 13.3 डिग्री सेल्सियस रहा।