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डेंगू के साथ अब डिप्थीरिया ने दी दस्तक, बच्चे की मौत

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बरेली। डेंगू का प्रकोप अभी कम नहीं हुआ है कि शहर में डिप्थीरिया ने भी दस्तक दे दी है। बुधवार को पुराना शहर के रोहली टोला में 11 साल के बच्चे की डिप्थीरिया से मौत हो गई। उसका भाई भी इसकी चपेट में है।
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स्वास्थ विभाग ने जिले को डिप्थीरिया मुक्त मानते हुए इससे बचाव के उपायों से ध्यान हटा लिया है, लेकिन इन दिनों यह जानलेवा बीमारी शहर में तेजी से पांव पसार रही है। रोहली टोला के बिजली मैकेनिक राजीव शर्मा के 11 साल के बेटे सक्षम की डिप्थीरिया से बुधवार को मौत हो गई। राजीव ने बताया कि 25 अक्तूबर को सक्षम को बुखार आया था। निजी अस्पताल ने आठ दिन भर्ती रखकर डिप्थीरिया का इलाज किया और फिर घर भेज दिया। कुछ दिन बाद सक्षम की तबीयत दोबारा बिगड़ी तो उसे राममनोहर लोहिया अस्पताल दिल्ली ले गए। जहां कुछ दिन इलाज के बाद उसे घर भेज दिया। घर पर कुछ दिन रहने के बाद उसकी तबीयत फिर बिगड़ी तो जिला अस्पताल मेें भर्ती कराया। वहां से लखनऊ रेफर कर दिया गया, लेकिन वहां लोहिया अस्पताल ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। इस पर परिजन बच्चे को घर ले आए। चार दिन बाद उसकी मौत हो गई। संजीव ने बताया कि उनका बड़ा बेटा 18 वर्षीय अभिषेक भी डिप्थीरिया की चपेट में है। इस बाबत सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वैसे भी महीने में एक-दो केस जिले में डिप्थीरिया के सामने आते रहते हैं। मरीज को शुरू में ही जिला अस्पताल आकर जांच करा लेनी चाहिए। ताकि इलाज में देरी न हो।

डॉक्टरों ने नहीं बताई सही बात
बरेली। सक्षम के पिता संजीव को सबसे ज्यादा तकलीफ इस बात से है कि उन्हें किसी भी डॉक्टर ने सही बात नहीं बताई। कोई डॉक्टर कहता रहा कि बच्चा दो महीने में टीक हो जाएगा तो किसी ने कहा कि इसका सात साल तक इलाज करना होगा। यहां तक कि राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भी यही कहा गया कि एक-डेढ़ साल तक इलाज कराना होगा।
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क्या है डिप्थीरिया
डिप्थीरिया एक उग्र संक्रामक रोग है। इसे आम बोलचाल की भाषा में गलाघोंटू या रोहिणी भी कहा जाता है। यह कॉरीनेबैक्टीरियम डिप्थीरी नामक बैक्टीरिया से पैदा होता है। अमूमन इसकी चपेट में दो से 14 साल तक के बच्चे आते हैं, लेकिन यह किसी भी आयु वर्ग में हो सकता है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि इसका बैक्टीरिया सबसे पहले गले और नाक में संक्रमण पैदा करता है। इन्फेक्शन की वजह से एक झिल्ली बन जाती है, जिसकी वजह से मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। एक स्थिति के बाद इससे जहर निकलने लगता है जो खून के जरिए दिमाग और दिल तक पहुंच जाता है और उसे डैमेज करने लगता है। इस स्थिति में पहुंचने के बाद मरीज की मौत का खतरा बढ़ जाता है। डिप्थीरिया संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।

लक्षण
- सांस लेने में कठिनाई
- गर्दन में सूजन, ठंड लगना
- बुखार, गले में खराश, खांसी
- इंफेक्शन मरीज के मुंह, नाक और गले में रहता है और फैलता है।

टीकाकरण कराकर बच्चे को बचाएं
डिफ्थीरिया से बचाने के लिए बच्चे को टीपीटी का टीका लगाया जाता है। एक साल के बच्चे को डीपीटी के तीन टीके लगते हैं। इसके बाद डेढ़ साल पर चौथा टीका और चार साल की उम्र में पांचवां टीका लगता है। टीकाकरण के बाद डिप्थीरिया होने की संभावना नहीं रहती है।
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