बरेली। आयुष्मान भारत योजना का कार्ड होने के बावजूद इलाज न मिलने से दीवानखाना के मतलूब हुसैन की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लीपापोती कर पल्ला झाड़ लिया। जांच तो की, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अस्पतालों को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। परिवार इससे नाराज है। पीएमओ में शिकायत के बाद अब परिवार ने कोर्ट जाने का फैसला किया है। मतलूब की बहन मालदा परवीन का कहना है कि दोषी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अब वह कोर्ट जाएंगी।
हृदय रोग से पीड़ित मतलूब हुसैन की हालत बिगड़ने पर घरवाले उनको शहर के चार बड़े अस्पतालों में लेकर गए, लेकिन कहीं भी आयुष्मान कार्ड से उन्हें इलाज नहीं मिला। आखिरकार उनकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की। मतलूब की बहन मालदा इस मामले की पीएमओ के अलावा डब्ल्यूएचओ से भी शिकायत कर चुकी हैं। अब उनका कहना है कि दोषी अस्पतालों पर कार्रवाई के लिए वह कोर्ट की शरण में जाएंगी। इस संबंध में उन्होंने वकीलों से भी संपर्क किया है।
अफसर कार्रवाई का दबाव बनाते हैं तो अस्पताल देते हैं पैनल से हटने की धमकी
आयुष्मान योजना के तहत शहर में 94 अस्पताल पैनल में शामिल हैं। कई अस्पतालों से शिकयत आ चुकी है कि कार्ड होने के बावजूद मरीजों को इलाज नहीं मिला। या तो पैसे देने पडे़े या फिर उन्हें दूसरे अस्पताल में जाना पड़ा। अधिकारी जब अस्पतालों पर दबाव बनाते हैं तो वे पैनल से हटने की धमकी देते हैं। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल का कहना है कि जितना होता है, उस हद तक अस्पतालों पर सख्ती करते हैं। अगर ज्यादा दबाव बनाएंगे तो अस्पताल पैनल से हटने की बात करने लगते हैं। उनको प्रेरित कर रहे हैं कि कार्ड धारकों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराएं।
जिले में 2.33 लाख पंजीकरण
आयुष्मान योजना में जिले के 2.33 लाख लोग पंजीकृत हैं। इनमें 1.03 लाख शहरी और 1.21 लाख ग्रामीण क्षेत्र के लाभार्थी हैं। सैकड़ों लोग प्रतिदिन कार्ड से इलाज कराने के लिए अस्पतालों में पहुंचते हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर को मायूस होकर लौटना पड़ता है। हालांकि सीएमओ का कहना है कि कार्ड धारकों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए अस्पतालों से लगातार बात कर रहे हैं।