बरेली। दीदी पुष्पांजलि ने आज की कथा में बताया कि नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा की जाती है। नाम से प्रकट है कि इनका रूप पूर्णत: गौर वर्ण है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। इनकी चार भुजाएं हैं, वाहन वृषभ है इसलिए वृषारूढ़ा भी कहा गया है इनको।
आनंद आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा में उन्होंने कहा कि पति रूप में शिव को प्राप्त करने के लिए महागौरी ने कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से इनका शरीर काला पड़ गया, लेकिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया। उनका रूप गौर वर्ण का हो गया। इसलिए ये महागौरी कहलाईं।
दीदी ने कहा कि वेद व्यास जी के इस प्रकार देवी भागवत के बारे में वर्णन करने से मां की महिमा उनके ह्रदय में स्फुटित हुई। हर मंदिर में तीन सीढ़ियां होती हैं, जिसमें पहली बुजुर्गों के लिये, दूसरी माता पिता और तीसरी बालकों के प्रतीक के रूप में होती है। एक प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार ऋषि मार्कण्डेय जब छोटे थे तब एक दासी ने भूलवश उन्हें दुग्धपान करा दिया था। एक बार जब उनके गांव ने ऋषि मुनि आये और उनसे अपने घर रात्रि विश्राम को कहा पर मार्कण्डेय जी पहले अपनी मां से पूछने आये, जबकि वो जानते थे कि ये तो पुण्य का कार्य है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार, कैंट विधायक पत्नी पुष्पा अग्रवाल, विहिप के पवन अरोड़ा थे। जितेंद्र रस्तोगी, प्रतीक अग्रवाल, मीनू सिंघल, दिव्य खंडेलवाल, दीप्ति खंडेलवाल आदि का सहयोग रहा।