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डॉक्टर साहब की दौड़भाग तो बच गई पर मासूमों की जान कैसे बचेगी

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बरेली। अपनी जरा सहूलियत के लिए जिला अस्पताल प्रशासन प्रसूताओं और नवजात बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। बुखार के मरीजों का वार्ड महिला अस्पताल में बना दिया गया है जहां प्रसूताओं के साथ नवजात बच्चों में भी बुखार के मरीजों का संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। हद यह है कि पिछले दिनों एडी हेल्थ डॉ. राकेश दुबे ने इस पर नाराजगी जताते हुए बुखार के मरीजों को तत्काल महिला अस्पताल में बनाए गए वार्ड से हटाकर पुराने प्रसूता वार्ड में ले जाने का निर्देश दिया था लेकिन चूंकि यह वार्ड कुछ दूर पड़ता है इसलिए जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी दौड़भाग बचाने के लिए उनके निर्देश को अनदेखा कर दिया।
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बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन ने इन मरीजों के लिए एक वार्ड महिला अस्पताल की तीसरी मंजिल पर बना दिया। इस वार्ड में पहले मलेरिया के मरीज भी रखे गए थे लेकिन संक्रमण की आशंका जताने पर जिला अस्पताल ने मलेरिया के मरीज वहां से हटा दिए। बुखार के मरीज अब भी वहीं पर हैं। रविवार को एडी हेल्थ डॉ. राकेश दुबे ने महिला अस्पताल का निरीक्षण किया तो इस पर नाराजगी जताई। उन्होंने बुखार के मरीजों को वहां से पुराने लेबर वार्ड में शिफ्ट करने के निर्देश दिए। मगर मंगलवार को जिला अस्पताल ने उस वार्ड की छत टपकने की बात कहकर मरीज शिफ्ट करने से इनकार कर दिया। वहीं महिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि छत ठीक है और कुछ दिन पहले ही मरम्मत कराई गई है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि पुराना लेबर वार्ड अस्पताल के दूसरे कोने पर है। ओपीडी से दूरी ज्यादा होने के चलते डॉक्टर वहां जाना नहीं चाहते इसलिए ही बहाना बनाया जा रहा है।
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