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बुखार के मरीज 32 हजार पार और मौत एक भी नहीं.. यह आंकड़ा सरकारी है

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बरेली। जिले में बुखार का प्रकोप लगातार जारी है और मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। वाईवैक्स के मरीजों का आंकड़ा 26,300 और फैल्सीपेरम के मरीजों का आंकड़ा छह हजार तक पहुंच गया है। वहीं जिला अस्पताल के ओपीडी में भी दो दिन से करीब ढाई हजार मरीज पहुंच रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग ने एक दिन हेल्थ कैंप लगाया, लेकिन फिर अभियान ठप हो गया। नतीजतन सीएचसी, पीएचसी के साथ ही झोलाछाप के यहां भी मरीजों की लाइन लगी है।
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पिछले साल बुखार के चलते जिले में सैकड़ों मौतें हुई थीं। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने अफसरों के पेंच कसते हुए संचारी रोगों पर काम करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग बुखार पर नियंत्रण करने में नाकाम हो गया है। जागरूकता न होने की वजह से देहात क्षेत्र में मरीज झोलाछाप के पास इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। देहात क्षेत्र में लगातार मौतें हो रही हैं, लेकिन सेहत महकमा इसे मानने को तैयार नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अब तक मलेरिया वाईवैक्स के लगभग 26,300, फैल्सीपेरम के लगभग छह हजार और मिक्स 217 केस सामने आ चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में बुखार से अब तक कोई मौत दर्ज नहीं है। इसके पीछे आंकड़ों की बाजीगरी है। सूत्रों का कहना है कि डेथ ऑडिट के दौरान मरीज के बारे में पूरी जानकारी ली जाती है। इस दौरान उसे बुखार के साथ कोई न कोई अन्य बीमारी भी सामने आती है और फिर उस मौत को बुखार के आंकड़ों में दर्ज नहीं किया जाता है। यही वजह है कि बुखार से मौत का रिकार्ड अब तक शून्य ही है।
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झोलाछापों पर बंद हुई कार्रवाई तो फिर बढ़ी मरीजों की भीड़
झोलाछाप पर कई महीने से कोई कार्रवाई न होने पर पिछले दिनों सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला ने यह प्रभार डॉ. अशोक कुमार से हटाकर डॉ. आलोक चंद्रा को दे दिया था। प्रभार बदलने के बाद कार्रवाई शुरू हुई और 11 सितंबर को दिन भर में करीब दो दर्जन झोलाछाप पर कार्रवाई की गई। इसके बाद यह मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया। कार्रवाई बंद होने का नतीजा यह है कि झोलाछापों के यहां फिर मरीजों की भीड़ बढ़ गई है।
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