बरेली। पिछले साल की तरह एक बार फिर बुखार जिले में महामारी की तरह फैलने लगा है। दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग का यह हाल है कि बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने और फैल्सीपेरम मलेरिया से लगातार लोगों की जान जाने का सिलसिला बने होने के बावजूद अफसर मरीजों के बजाय अपने बचाव में जुटे हुए हैं। अफसरों के जिले में बुखार से एक भी मौत न होने के दावों के बीच सोमवार को गैनी में बुखार पीड़ित एक और मौत हो गई। इसके साथ भमोरा इलाके में 65 और लोगों के फैल्सीपेरम मलेरिया से पीड़ित होने की पुष्टि हुई है। मझगवां इलाके में भी बुखार से सैकड़ों लोगों की जान पर बनी हुई है।
अलीगंज संवाददाता के मुताबिक गैनी निवासी लालू मौर्य की बेटी लक्ष्मी को कई दिन पहले बुखार आया था। घरवालों के अनुसार वे लोग उसे लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे लेकिन वहां उसे इलाज नहीं मिल पाया। इसके बाद वे एक स्थानीय झोलाछाप से ही इलाज करा रहे थे। इस इलाज के बावजूद लड़की की हालत लगातार बिगड़ती गई और सोमवार को उसने दम तोड़ दिया। उधर, भमोरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सोमवार को 311 बुखार पीड़ितों की जांच हुई जिनमें से 97 वाइवैक्स मलेरिया और 65 फैल्सीपेरम मलेरिया के निकले। मझारा में रहने वाले पुत्तु लाल ने बताया कि वे बुखार से कई दिनों से पीड़ित थे, सोमवार को ज्यादा हालत बिगड़ने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती हुए हैं। अस्पताल प्रभारी गौरव शर्मा ने बताया लोग गर्मी से बचने के लिए खुले में सो रहे हैं और इसी वजह से मच्छरों का शिकार हो रहे हैं।
मझगवां में पहले जांच कराने के लिए आपस में भिड़े मरीज
बुखार के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ने और सरकारी अस्पतालों में इलाज के इंतजाम न होने की वजह से मारामारी जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। मझगवां ब्लॉक के गांवों में बुखार का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं जिन्हें अस्पताल का स्टाफ भी संभाल नहीं पा रहा है। सोमवार को तो यह नौबत आ गई कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पर्चे बनवाने के बाद बुखार की पहले जांच कराने के लिए रोगी आपस में ही भिड़ गए। रोगियों की बढ़ती तादाद से अस्पताल का स्टाफ भी सकते है। पीड़ितों की जांच में ज्यादातर मलेरिया के रोगी मिल रहे है।
मुख्यमंत्री जी! अफसर झूठे दावे कर रहे हैं, बुखार से आप ही बचाइए
आंवला। पिछले साल बुखार से दो सौ से ज्यादा लोगों की मौत होने की लोगों पर इस कदर दहशत हावी है कि उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर मदद की फरियाद की है। अतरछेड़ी में रहने वाले मुनेन्द्र कुमार सिंह समेत कई लोगों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को लिखे पत्र में कहा है कि उनके गांव में बुखार तेजी से फैल रहा है। हर घर में कोई न कोई बुखार से तप रहा है। इसके बावजूद न गांव में साफ सफाई हो रही है न सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। स्कूल के रास्ते में गंदगी के ढेर लगे है। सफाईकर्मी सिर्फ ग्राम प्रधान के आवास पर सफाई करके चले जाते हैं। उन्होंने गांव में कीटनाशक छिड़काव कराने की मांग की है। पत्र में बुखार की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के हर घर पहुंचने के दावे को भी झूठ बताया गया है और बुखार पीड़ितों की मदद के लिए गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजने का अनुरोध किया है।
शाही में बुखार से मौत की सूचना जांच में गलत मिली है। गैनी में हुई मौत का मामला संज्ञान में नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गैनी भी पहुंचेगी। लोग झोलाछाप से इलाज कराकर अपनी जान सांसत में डाल रहे हैं। - डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ
सीएमओ पहले ही खड़े कर चुके हैं हाथ
सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल ने जुलाई में ही स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को चिट्ठी लिखकर जिले में डॉक्टरों की कमी का जिक्र करते हुए संक्रामक रोगों से निपटने में हाथ खड़े कर दिए थे। इस चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि जिले में चिकित्सा अधिकारियों के कुल 228 पद हैं जिनमें से सिर्फ 127 पदों पर ही तैनाती है। इनमें से भी 23 चिकित्सा अधिकारी लंबे समय से गैरहाजिर हैं और नौ पीजी प्रशिक्षण पर हैं। सिर्फ 95 चिकित्सा अधिकारी ही ड्यूटी पर हैं। इनमें से भी 26 की ड्यूटी कारागार, प्रशासनिक पदों और पुलिस-पीएसी अस्पतालों में होने के कारण वास्तविक रूप से सिर्फ 69 चिकित्साधिकारी चिकित्सा कार्य में लगे हैं। इन्हीं पर राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की भी जिम्मेदारी है। सीएमओ ने लिखा था कि ऐसे में अगर पिछले साल की तरह मलेरिया का प्रकोप फैला तो पर्याप्त मात्रा में चिकित्साधिकारियों की आवश्यकता पड़ेगी।
हर तरफ बुखार का ताप तो अब संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाएंगे
बरेली। जिले में फैल्सीपेरम मलेरिया और डेंगू के प्रकोप के बाद जापानी इंसेफेलाइटिस का मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। ऐसे में जून में शासन से जारी हुआ वह आदेश भी उन्हें याद आ गया है जिसमें संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाने के बारे में कहा गया था। बुखार से पीड़ित लोगों के इलाज में जुटे चिकित्साधिकारियों को अब इस अभियान में भी समय देना पड़ेगा।
सोमवार को फतेहगंज पश्चिमी ब्लॉक के गांव उनासी के प्राइमरी स्कूल में अभियान का शुभारंभ मीरगंज विधायक डॉ. डीसी वर्मा ने किया। उन्होंने ग्राम पंचायत अधिकारी को गांवों में फॉगिंग कराने, स्वास्थ्य विभाग को लोगों को जागरूक करने को कहा। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला ने मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया, चिकनगुनिया और दिमागी बुखार से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने का सुझाव दिया। हफ्ते में एक दिन घरों के कूलर, फ्रीज और टंकी को साफ करने, मच्छरदानी का प्रयोग करने, झोलाछाप डॉक्टर से इलाज न कराने, बुखार आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज कराने को कहा। इसके बाद स्कूल के बच्चों ने रैली निकालकर लोगों को संचारी रोगों के प्रति जागरूक किया गया। रैली भी निकाली गई। यहां सीडीओ सत्येंद्र कुमार, एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार, डीएमओ डीआर सिंह व अन्य मौजूद रहे।
रिठौरा में भी अफसरों को नहीं दिख रहे बुखार पीड़ित
रिठौरा। कस्बे के साथ इलाके के कई गांवों में सैकड़ों लोग बुखार से तप रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई मदद नहीं मिल पा रही है। गांव लभेडा में नाजिम, मोहम्मद युसूफ, हाफिज, जाकिर, गांव खोह में कल्पना, अल्ताफ काजल, मानदेई, गांव गोपलापुर में फिरोज यूनिस इसके अलावा नगर में रामपाल, रामकिशन, सविता, विद्या, कविता, समेत सैकड़ों लोग बुखार के साथ त्वचा रोगों से परेशान हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से टीकाकरण और कीटनाशक छिड़काव की मांग की है।
जेई पीड़ित की हालत स्थिर
पिछले दिनों एक निजी अस्पताल में भर्ती नवाबगंज की जेई पीड़िता की हालत स्थिर बनी हुई है। आईडीएसपी सेल कर्मियों के मुताबिक जेई पीड़िता की हालत की लगातार निगरानी हो रही है। हालांकि, हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। वहीं, जेई के कहर का शिकार हुई पीलीभीत की राजीव कॉलोनी निवासी महिला के मौत होने की रिपोर्ट पीलीभीत सीएमओ को भेज दी गई है।