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नर्सिंग स्टूडेंट्स पर गैस्ट्रिक मनोरोग का हमला, दो की हालत गंभीर

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बरेली। मानसिक चिकित्सालय में भोपाल से ट्रेनिंग पर आए नर्सिंग स्टूडेंट्स एक ‘अनजान’ बीमारी के शिकार हो रहे हैं। उनके शरीर के तापमान का अचानक बढ़ रहा है। आंखाें की पलकें पलट रही हैं और तेज दर्द के बाद बेहोश होकर गिर रहे हैं। अब तक पांच छात्र इस अनजान बीमारी की गिरफ्त में आ चुके हैं। पहले डॉक्टरों ने इसे महज डीहाइड्रेशन, बुखार और मौसम का बदलाव माना लेकिन अब वे इसे ‘गैस्ट्रिक मनोरोग’ मान रहे हैं। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी स्पष्ट होने की बात कही है।
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पिछले करीब 15 दिनों में एक के बाद एक पांच स्टूडेंटस के बीमार होने से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मंगलवार को भी एक नर्सिंग छात्रा को गंभीर हालत में जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में भर्ती कराया गया है। इस दौरान पीड़ित छात्रा पारुल ठाकुर के साथ मौजूद सहपाठियों ने बताया कि पिछले दो दिनों से उसकी हालत खराब हो रही थी। इसकी सूचना अस्पताल प्रशासन को दी गई थी, इस पर प्राथमिक उपचार मुहैया कराया गया लेकिन मंगलवार को अचानक हालत बेकाबू हुई तो उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। इससे दो दिन पहले मेल नर्सिंग स्टूडेंट प्रवीण भी इसी बीमारी से ग्रसित है और उसका इलाज चल रहा है। स्टूडेंट टीम के साथ मौजूद ट्यूटर के मुताबिक वे भोपाल के आरडी मेमोरियल कॉलेज ऑफ नर्सिंग से बरेली माह भर की ट्रेनिंग पर आए हैं। 1 अगस्त को ट्रेनिंग शुरू हुई और 20 अगस्त के बीच पांच स्टूडेंट्स में ऐसी अजीब बीमारी होने के बाद अन्य स्टूडेंट्स भी घबराए हुए हैं।
मानसिक रोगियों के बीच रहने का प्रभाव
मानसिक अस्पताल की डायरेक्टर डॉ. प्रमिला गौड़ ने आशंका जताई कि मानसिक रोगियों के बीच रहने से भी कमजोर मनोस्थिति के स्टूडेंट्स की मानसिक हालत भी प्रभावित होने लगती है। गैस्ट्रिक मनोरोग भी उसी का असर होने की संभावना जताई है। उन्होंने बताया कि एएनएम और बीएससी थर्ड ईयर के स्टूडेंट्स को बरेली में ट्रेनिंग कराने से मना किया था लेकिन जबरन उनके कॉलेज ने स्टूडेंट्स को यहां ट्रेनिंग पर भेज दिया है। हालांकि, स्थिति बिगड़ने पर अब सभी की छुट्टी कर एक दो दिन में वापस भोपाल भेज दिया जाएगा।
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क्या होता है गैस्ट्रिक मनोरोग
मनोरोग विशेषज्ञ के मुताबिक गैस्ट्रिक मनोरोग की वजह ‘इरिटेबल बावेल सिंड्रोम’ होता है। इसके पीड़ित को पेट में रह-रह कर दर्द, ऐंठन और मरोड़ की समस्याएं रहती है। शरीर का तापमान बढ़ता है और एक स्थिति ऐसी आती है जब यह दिमाग पर हावी होने लगता है। कहा, पाचन क्रिया में मस्तिष्क की अहम भूमिका होती है। इस सिंड्रोम के मरीजों में चिंता, बेचैनी, अवसाद, अनिद्रा जैसे लक्षण दिखते हैं। इससे मस्तिष्क अस्वस्थ होने का असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। बताया, अक्सर लंबी यात्रा या जलवायु परिवर्तन के बाद डीहाइड्रेशन की अधिकता से मस्तिष्क की नसें कमजोर होने लगती हैं।
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