बरेली। शासन स्तर से कार्रवाई और सख्त निर्देश के बावजूद जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। रविवार को अचानक हुए फाल्ट से करीब छह घंटे तक अस्पताल में बिजली गुल रही। इससे मरीजों को खासा परेशानी हुई। बताते हैं कि बिजली जाने के दो घंटे बाद तक अस्पताल प्रशासन ने इसकी सुध नहीं ली। मरीजों की हालत बिगड़ने लगी तो उन्होंने बिजली व्यवस्था सुचारू कराई।
रविवार की सुबह करीब आठ बजे जिला अस्पताल में बिजली चली गई। आम दिनों की कटौती समझकर करीब दो घंटे तक अस्पताल प्रशासन बिजली आने का इंतजार करता रहा। बताया जाता है कि इसी बीच कालीबाड़ी निवासी ब्र्रेन ट्यूमर से पीड़ित मरीज रमेश चंद्र की मौत हो गई। जिसके बाद डॉक्टरों ने हंगामे के आसार देखते हुए तत्काल सीएमएस को सूचना दी। सीएमएस ने बिजली विभाग को कॉल कर फाल्ट दुरुस्त कराने को कहा। दोपहर करीब दो बजे अस्पताल की बिजली व्यवस्था दुरुस्त हो सकी। लंबे समय तक बिजली कटौती ने मरीजों को बेहाल कर दिया। ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे मरीज हाथ से किताब, कपड़ों से हवा कर पसीना सुखाते रहे। वहीं, इमरजेंसी में स्थिति और भी बदतर रही।
महिला अस्पताल ने नहीं किया भर्ती
पिछले दिनों करीब तीन घंटे तक जिला और महिला अस्पताल का चक्कर लगाने के बाद एक बच्ची की मौत हो गई थी। जिस पर जिला अस्पताल के सीएमएस सस्पेंड हुए हैं और महिला अस्पताल की सीएमएस पर विभागीय जांच चल रही है। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन पर कोई असर नहीं हो रहा। शनिवार की शाम हजियापुर निवासी 7 माह की गर्भवती यासमीन पति इम्तियाज हुसैन के साथ महिला अस्पताल पहुंची। आरोप है कि वे शाम को महिला अस्पताल पहुंचे तो वहां के स्टाफ ने उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया। जिला अस्पताल वे पहुंचे तो उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कर इलाज शुरू हो गया लेकिन रविवार को एक और महिला को उनके बेड पर लिटा दिया। जिससे उन्हें तकलीफ हुई तो शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
सुबह फाल्ट होने से लंबे समय तक बिजली गुल रही। बिजली विभाग को कॉल कर सूचना दी गई, जिसके बाद वहां से कर्मचारी आए और फाल्ट को ठीक किया। मरीजों की संख्या अधिक होने से एक बेड पर दो मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है। सीमित सुविधाओं में मरीजों को बेहतर इलाज देना प्राथमिकता है। - डॉ. टीएस आर्या, सीएमएस, जिला अस्पताल