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बदहाल जिला अस्पताल- दीवार पर मलेरिया से बचाव के सुझाव, जमीन पर मच्छरों का पड़ाव

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बरेली। बारिश के दिनों में डायरिया और मलेरिया के संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। पिछले साल भी बुखार से जिले भर में कोहराम मचा था और कई मौतें हुई थीं। इस बार फिर बुखार का प्रकोप बढ़ने लगा है। मगर जिला अस्पताल में हालात नरक से बदतर हैं। इमरजेंसी वार्ड में एक-एक वार्ड पर दो-दो मरीज लेटे हैं। बुधवार को बुजुर्ग महिला मरीज बेड के नीचे फर्श पर घंटों पड़ी रही। वही, इमरजेंसी वार्ड के पास ही गंदा पानी भरा है, जिसमें मक्खी और मच्छरों का बसेरा है। जिला अस्पताल के ये हालात तब हैं, जब दो सीएमएस लापरवाही के मामलों में फंस चुके हैं।
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दिन बुधवार, समय दोपहर 2:15 बजे। स्थान जिला अस्पताल का इमरजेंसी फीमेल वार्ड। छत पर बने इस वार्ड में भीषण गर्मी और उमस के बावजूद एक-एक बेड पर दो-दो मरीज लेटे थे। वार्ड में एक कोने में गंदगी भरी थी। वहीं, 55 साल की महिला मरीज जमीन पर पड़ी थी। कपड़ों से बदबू आ रही थी और वह बोल भी नहीं पा रही थी। ड्यूटी स्टाफ का कहना था कि महिला लावारिस और मानसिक मंदित है। बेड पर लिटाते हैं, लेकिन वह बार-बार गिर जाती है।
दीवार पर संक्रमण से बचने के उपाय

पास ही बीमारी फैलाने का इंतजाम
इमरजेंसी वार्ड की उत्तर दिशा में छोटे-छोटे दो कमरे बने हैं। उनमें एक कमरे की दीवार पर लिखा है - मस्तिष्क ज्वार/ दिमागी बुखार लिखा है और यहां इन बीमारी के फैलने का कारण, बचाव और पहचान आदि लिखी है। इसके पास ही फर्श पर बारिश का गंदा पानी भरा है। पानी के ऊपर तमाम मच्छर मंडराते दिख रहे थे। पानी के बीच ही टूटा स्ट्रेचर खड़ा था, जिस पर मक्खियां बैठी थीं। जिला अस्पताल परिसर में कई अन्य जगह भी गंदा पानी भरा है। मगर देखने वाला कोई नहीं है।
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बुखार से दो सौ लोगों की हुई थी मौत
पिछले साल जिले में फेल्सीपेरम मलेरिया और बाइवेक्स मलेरिया बुखार ने जिले में दो सौ से अधिक लोगों की जान ली थी। हजारों लोग बुखार की चपेट में आए थे। महीनों तक जिले में कोहराम मचा था। मगर अफसर फिर भी गंभीर नहीं हैं।

दो सीएमएस पर हो चुकी है कार्रवाई
पिछले साल बुखार फैलने के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने जिला अस्पताल में दौरा किया था, जिसके बाद जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. साधना सक्सेना को हटा दिया गया था। पिछले महीने जिला अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही से एक बच्चे की मौत हुई तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला अस्पताल के तत्कालीन सीएमएस डॉ. केएस को सस्पेंड किया था। इसके बावजूद जिला अस्पताल के हालात नहीं सुधर रहे।

ममता आश्रम की संवासिनी को हुआ फेल्सीपेरम बुखार
हरूनगला में नकटिया नदी के पास स्थित मानसिक मंदित आश्रय गृह की संवासिनी सुनयना (31) को बुखार आने पर 16 जुलाई को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच कराने पर उसे फेल्सीपेरम मलेरिया की पुष्टि हुई। हालांकि इलाज होने के बाद तबियत ठीक होने पर बुधवार को सुनयना को छुट्टी दे दी गई।

ओपीडी में 40 प्रतिशत बुखार के मरीज
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि बारिश के साथ संक्रामक रोगों के मरीज बढ़े हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों में 40 प्रतिशत बुखार के होते हैं। ज्यादातर को मलेरिया बाइवेक्स और वायरल बुखार होता है। फेल्सीपेरम बुखार भी शुरू हो गया है।

सीवर लाइन ब्लॉक होने से पानी भर जाता है। बारिश का पानी भर गया होगा। पानी में मच्छर मारने की दवा डलवा दी जाती है। नगर निगम की टीम से मंगलवार को अस्पताल परिसर में दूसरी ओर भरा पानी साफ किया था। इधर का पानी भी साफ करा दिया जाएगा।
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- डॉ. एके आर्या, सीएमएस जिला अस्पताल
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