बरेली। मौसम में बदलाव और गर्मियों के दिन शुरू होते ही सीटी स्कैन यूनिट में हेड सीटी स्कैन की जांच के लिए कतार लगने लगी। अप्रैल में अब तक दो सौ लोगों की जांच हुई। स्टाफ के मुताबिक 20 मार्च के बाद से 20 फीसदी जांच बढ़ी है। पहले 40 जांच होती थी अब 50-60 पहुंच रही है।
फिजिशियन डॉ. राहुल बाजपेई के मुताबिक मौसम में बदलाव के दौरान कई लोगों के शरीर की क्षमता क्रमिक पैटर्न के अनुसार नहीं बदल जाता। इससे तेज धूप और पानी की कमी से चक्कर, बेहोशी और सिरदर्द बढ़ जाते हैं। सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर से माइग्रेन ट्रिगर होने से पुराने मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव या फिर पुरानी चोट और दुर्घटना, अचानक गिरने से सिर पर चोट के मामले भी बढ़ते हैं। अगर दवा से समस्या नहीं टलती तो सीटी स्कैन जांच लिखी जाती है। रोग की वजह पता चलने पर दवा लिखी जाती है।
बताया कि इससे दिमाग में ब्लीडिंग, क्लॉट, सूजन, स्ट्रोक या गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या की पहचान होती है। बेहोशी या लगातार सिरदर्द के कारण स्पष्ट होते हैं। अगर आंखों के आगे अचानक अंधेरा छाए, जुबान लडखडाए, फोकस में दिक्कत हो तो भी सीटी जांच कराई जाती है।