पीएसी फायरिंग रेंज में अभ्यास से लौट रहे हेड कांस्टेबल के हाथ से कार्बाइन छूटी तो उससे हुए दो फायर हो गए। दोनों गोलियां साथी हेड कांस्टेबल सोबरन पाल के पेट से पार हो गईं। गनीमत रही जो उनकी जान बच गई। एसएसपी और पीएसी कमांडेंट ने निजी अस्पताल में घायल का हालचाल लेकर बेहतर उपचार कराने का निर्देश दिया।
कन्नौज के थाना तिर्वा के गांव एमा निवासी सोबरन पाल (58) पीएसी आठवीं वाहिनी बरेली में हेड कांस्टेबल पद पर तैनात हैं। उनकी कंपनी की ड्यूटी लखीमपुर खीरी में लगी है। वहां से कंपनी के चिह्नित स्टाफ को वार्षिक निशानेबाजी प्रशिक्षण के लिए बुधवार सुबह वाहिनी मुख्यालय बुलाया गया था। यहां फायरिंग बट पर अभ्यास के बाद शाम करीब साढ़े चार बजे सोबरन व उनके साथी लखीमपुर खीरी वापस लौटने को गाड़ी में बैठ रहे थे।
इसी दौरान उनके साथी हेड कांस्टेबल रामकुमार की कार्बाइन हाथ से छिटककर नीचे गिर गई। उससे अचानक ही दो फायर हो गए जो गोलियां सोबरनपाल के सीने के नीचे और पेट में बांयी ओर घुस गईं। इससे सोबरन चीखते हुए गिर गए। रामकुमार भी स्थिति से अवाक रह गए और साथियों संग उन्हें उठाया। क्वार्टर गार्ड रामनाथ राणा समेत पीएसी स्टाफ उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। यहां प्रारंभिक परीक्षण के बाद उन्हें सेटेलाइट रोड के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अफसरों ने परिवार को दी जानकारी
घटना की जानकारी मिलते ही एसएसपी अनुराग आर्य, एसपी सिटी राहुल भाटी निजी अस्पताल पहुंच गए। पीएसी कमांडेंट आकाश तोमर भी तत्काल यहां आ गए। अधिकारियों ने डॉक्टरों से बात करके एक्सरे व एमआरआई की रिपोर्ट देखी। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों गोलियां पार निकल चुकी हैं। रक्तस्राव रुक जाए तो खतरा ज्यादा नहीं रहेगा। अधिकारियों ने डॉक्टरों से कहा कि वह बेहतर उपचार करें, इसके लिए खर्च की चिंता न करें। अधिकारियों ने ही फोन से सोबरन के बेटे नीलेश को सूचना दी, वह दिल्ली में थे और बरेली रवाना हो गए।
घायल हेड कांस्टेबल के दर्ज हुए बयान
- एसएसपी ने फॉरेंसिक टीम व पुलिस भेजकर मौका मुआयना कराया। साथ ही एसएसपी व कमांडेंट ने घायल सोबरन के बयान दर्ज किए। एसएसपी के मुताबिक वीडियो पर दिए गए बयान में सोबरन ने बताया कि यह घटना महज इत्तेफाक थी। इसमें साथी का कोई कसूर नहीं है।
परिसर में प्रशिक्षण से लौटते वक्त साथी की कार्बाइन गिरने से हेड कांस्टेबल सोबरन पाल को गोली लगी हैं। सोबरन की हालत खतरे से बाहर है। उनका इलाज कराया जा रहा है।
- आकाश तोमर, कमांडेंट पीएसी, आठवीं वाहिनी