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Bareilly News: रैकेट थामा और भर दी आसमां को छूने की उड़ान

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बरेली। खेलों में बेटियों की भागीदारी बढ़ती जा रही है। वर्तमान समय में बैडमिंटन एक ऐसा खेल बनकर उभरा है, जिसमें शहर की बेटियां अपना भविष्य तलाश रहीं हैं। कोई स्वास्थ्य कारणों से खेल से जुड़ीं, तो किसी को अपने भाई से प्रेरणा मिली। वहीं, किसी ने समर कैंप के माध्यम से रैकेट थामा और पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब पीवी सिंधु, साइना नेहवाल और ली चोंग वेई जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को देखकर इन बेटियों में भी देश के लिए खेलने का सपना जग रहा है।
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स्वास्थ्य कारणों से थामा रैकेट, प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता तक पहुंचीं

15 वर्षीय आलमगिरी गंज निवासी अदिति ने शुरुआत में स्वास्थ्य समस्याओं के कारण बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। घरवालों की सलाह पर उन्होंने फिट रहने के लिए रैकेट थामा, लेकिन यह खेल जल्द ही उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गया। उनकी सेहत में सुधार होता गया और उनका खेल के प्रति लगाव बढ़ता गया। आज अदिति सिर्फ सेहत के लिए नहीं, बल्कि खेल में अपना भविष्य बनाने के लिए खेल रही हैं। वह पीवी सिंधु और साइना नेहवाल को अपना आदर्श मानती हैं। इसके साथ ही वह, आगरा में हुई प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं।

अब बनना चाहती हैं चैंपियन

लक्ष्मीनगर में रहने वालीं 11 वर्ष की कनिष्का का बैडमिंटन से जुड़ाव उनके घर से शुरू हुआ। उनके बड़े भाई युवराज जोशी राष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन खेल चुके हैं। भाई को खेलता देख, कनिष्का के मन में भी इस खेल को लेकर रुचि जगी। कनिष्का को अपने अभिभावकों का भी पूरा सहयोग मिला। बेटी में खेल के प्रति लगन को देखकर, पिता ने उन्हें पेशेवर रूप से ट्रेनिंग दिलवाई और खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वह बताती हैं कि बड़े खिलाड़ियों के लाइव मैच देखती हैं और खेल की तकनीकों को सीखने की कोशिश करती हैं। कनिष्का अंडर-13 योनेक्स सनराइज टूर्नामेंट में प्रतिभाग कर चुकी हैं। संवाद
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समर कैंप से शुरू हुआ सफर, खेलो इंडिया में भी दिखा चुकीं हैं हुनर

कोहाड़ापीर के पास रहने वाली 21 वर्षीय काव्या बरनवाल ने बैडमिंटन की शुरुआत एक समर कैंप के दौरान की थी, जब वह चौथी कक्षा में थीं। उस समय खेल उनके लिए सिर्फ छुट्टियों का एक मजेदार विकल्प था। लेकिन कैंप में लगातार जीत और कोच की सराहना ने उनके मन में आत्मविश्वास और रुचि दोनों भर दी। यहीं से उन्होंने बैडमिंटन को गंभीरता से लेना शुरू किया। काव्या ने अब तक कई जिला और जोनल स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक जीते हैं। वर्ष 2023 में वह खेलो इंडिया प्रतियोगिता के लिए बेंगलुरु भी गई थीं, जो उनके लिए एक बड़ा अनुभव रहा।
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