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बरेली में यौन उत्पीड़न के आरोपी हेडमास्टर पर कार्रवाई क्यों नहीं

Wed, 07 Mar 2018 01:36 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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कोर्ट - फोटो : amar ujala
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यौन उत्पीड़न की घटनाओं में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कार्य स्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकने के लिए सुप्रीमकोर्ट द्वारा विशाखा केस में जारी गाइड लाइन का पालन करने के बारे में प्रदेश सरकार से जानकारी मांगी है। 

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बरेली के एक प्राइमरी स्कूल में कार्यरत सहायक अध्यापिका की तीन वर्षीय बेटी के यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने पर भी कोर्ट ने बेसिक शिक्षा सचिव से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पीड़ित सहायक अध्यापिका का एक सप्ताह में बरेली से मेरठ तबादला करने का निर्देश दिया है। प्रधानाध्यापक के खिलाफ इस मामले में प्राथमिकी दर्ज है और उप बेसिक शिक्षा अधिकारी की जांच में प्रधानाध्यापक को दोषी पाते हुए अध्यापिका के तबादले की संस्तुति की गई है। याची की अर्जी के बावजूद उसका तबादला नहीं किया गया। इस पर पीड़ित अध्यापिका ने हाईकोर्ट की शरण ली। उसकी याचिका पर न्यायमूर्ति अजय भनोट सुनवाई कर रहे हैं। याचिका पर सुनवाई 22 मार्च को होगी।
पीड़ित सहायक अध्यापिका ने 18 जुलाई 2017 को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और पॉस्को एक्ट के तहत बरेली में प्रधानाध्यापक के खिलाफ  प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विभागीय शिकायत कर मामले की जांच करने और उसका तबादला पति और ससुर के गृह जनपद मेरठ करने की मांग की है। याची का कहना है कि उसे धमकाया जा रहा है। उसकी जान को खतरा है। इसके बावजूद अधिकारियों ने उसका तबादला नहीं किया। जहां उसकी बच्ची का शोषण किया गया, उसी विद्यालय मेें काम करने के लिए विवश कर उसके सम्मानपूर्ण जीवन के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
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कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि जिन अधिकारियों ने शिकायत पर कार्रवाई करने में लापरवाही बरती है, उन पर कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़िता की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएं। जांच रिपोर्ट के बाद पीड़िता का तबादला न करने पर स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि महिलाओं के यौन उत्पीड़न से सुरक्षा कानून-2013 का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। सरकार को दो सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा पर नीति तय करने का आदेश दिया है। 

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