सूफी सिलसिले के अजीम बुजुर्ग, रूहानियत के अलंबरदार खानकाह नियाजिया के सज्जादा नशीन हजरत शाह मोहम्मद हसनैन उर्फ हसनी मियां दुनिया ए फानी से पर्दा कर गए। उनके दुनिया को अलविदा कहने से देश विदेश के तमाम मानने और चाहने वालों में गम की लहर दौड़ गई है। विदेशों से भी लोग लगातार फोन कर रहे हैं और गम का इजहार कर रहे हैं।
हजरत शाह हसनी मियां की मंगलवार रात तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद उन्हें यहां के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां रात लगभग एक बजकर 25 मिनट पर उन्होंने आखिरी सांस ली और इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्हें बुधवार शाम को मगरिब की नमाज के बाद सुपुर्दे खाक कर दिया गया। उनकी उम्र लगभग 70 वर्ष थी। हसनी मियां के विसाल की खबर फैलते ही देश भर से और बाहरी मुल्कों से गम और मलाल का लोगों ने इजहार किया।
इधर, खानकाह नियाजिया और आसपास के तमाम इलाकों से लोग रात में ही खानकाह पहुंच गए। सुबह से उनके तमाम मानने और चाहने वालों का खानकाह पर तांता लगा रहा। उनके चाहने वाले गम और सदमे के माहौल में नजर आए।
हजरत हसनी मियां नियाज बेनियाज हजरत शाह नियाज अहमद किबला के पांचवें जानशीन रहे। 1980 में उन्होंने सज्जादगी की जिम्मेदारी संभाली और खानकाह को उरूज पर पहुंचाया। लगातार देश दुनिया की तमाम हस्तियां खासकर संगीत घरानों के बड़े से बड़े नाम इस खानकाह से जुड़े हुए हैं। इसमें तमाम फनकार हसनी मियां के मुरीद भी हैं। वह चाहे किसी भी मजहब-ओ- मिल्लत के कलाकार हों।
हसनी मियां ख्वाजा गरीब नवाज और गौसो ख्वाजा के जानशीन भी रहे। अब उनके विसाल के बाद के बड़े साहबजादे नायब सज्जादा अलहाज शाह मेंहदी मियां सज्जादा नशीन की गद्दी संभालेंगे।