फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरिवंश राय बच्चन की प्रेम कहानी... बरेली में गिर गया मेरा झुमका

विज्ञापन
Harivansh Rai Bachchan's love story... my jhumka fell in Bareilly
विज्ञापन
बरेली। ‘मेरा झुमका बरेली में गिर गया है’, मशहूर कवि हरिवंश राय बच्चन का यह कथन एक साक्षात्कार में उस प्रश्न का जवाब था जो उनसे उनकी तेजी बच्चन से प्रेमकहानी के बारे में पूछा गया था। तेजी बच्चन उस समय तेजी सूरी थीं। 1941 की बात है जब हरिवंश राय और तेजी की पहली मुलाकात बरेली में हुई। पहली ही नजर में दोनों ने समझ लिया कि उन्हें उनका जीवनसाथी मिल गया है।
विज्ञापन

हरिवंश राय बच्चन ने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘नीड़ का निर्माण फिर’ में लिखी आत्मकथा के दूसरे भाग में अपनी प्रेमकहानी का विस्तार से जिक्र किया है जिसकी शुरुआत कुछ यूं है कि अगर 70 साल पहले 31 दिसंबर 1941 में वह बरेली न आते तो शायद उनकी प्रेम कहानी पूरी नहीं होती और उन्हें तेजी सूरी से पहली नजर में प्यार न होता। तेजी का रूप पहली ही नजर में किसी को आकर्षित कर सकता था। तेजी ने अगर उन्हें करुणा की नजर से न देखा होता तो शायद उनकी आंखें भी नीची हो जातीं। (संवाद)
हो चुकी थी सगाई पर मंगेतर पसंद नहीं था तेजी को : तेजी सूरी लाहौर की रहने वाली थीं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे एक युवक से उनकी सगाई भी हो चुकी थी। तेजी मनोविज्ञान की शिक्षक थीं और महसूस करती थीं कि वह और उनका मंगेतर बेमेल विचार के हैं। वह सगाई पर सवाल उठाने लगी थीं। तेजी के ही कॉलेज की प्रिंसिपल प्रेमा जौहरी बरेली की रहने वाली थीं जो उनकी मनोदशा समझने के बाद दिसंबर में पड़ी क्रिसमस की छुटियों पर उन्हें अपने साथ बरेली ले आईं।
विज्ञापन

प्रभा जौहरी की रामपुर बाग में बिजली कंपनी के पास कोठी थी। उनके पति प्रकाश जौहरी बरेली कॉलेज में अंग्रेजी के शिक्षक थे और हरिवंश राय बच्चन के मित्र थे। उस दौरान हरिवंश राय पंजाब के एक कवि सम्मेलन में गए थे। प्रकाश जौहरी ने उन्हें फोन कर बरेली होकर जाने को कहा। प्रकाश और प्रभा के घर पर 31 दिसंबर की सुबह चाय के दौरान हरिवंश राय ने पहली बार तेजी को देखा।
चट मंगनी पट ब्याह : 31 दिसंबर की ही शाम को प्रेमा और प्रकाश जौहरी दोनों को घोड़ागाड़ी पर घुमाने ले गए। तेजी अपनी इच्छा से हरिवंश राय के साइड वाली सीट पर बैठीं। रात को प्रभा जौहरी की कोठी के ही पास रहने वाले कवि रामजी शरण सक्सेना के घर पर संगीत कार्यक्रम था, वहां भी तेजी और हरिवंश राय आसपास बैठे।
घर लौटने के बाद तेजी सूरी ने नए साल पर हरिवंश राय से अपनी कविताएं सुनाने की फरमाइश की। हरिवंश राय बच्चन ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उनकी कविता सुनकर तेजी रोने लगीं, उन्हें देख उनकी आंखों में भी आंसू आ गए। प्रभा और प्रकाश उन्हें अकेला छोड़कर कमरे से बाहर चले गए। इसके बाद वे दोनों एक-दूसरे को गले लगाकर रोए।
1942 की पहली जनवरी को जौहरी दंपती ने दोनों के गले में मालाएं डलवाकर उनकी सगाई की घोषणा कर दी। कुछ दिनों बाद तेजी अपने पिता का आशीर्वाद लेने लाहौर चली गईं, इधर हरिवंश राय ने शादी की तैयारियां शुरू कर दीं। तीन सप्ताह बाद ही 24 जनवरी को दोनों की शादी हो गई। अक्तूबर 1942 में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन उनके बेटे के रूप में दुनिया में आए।
पहली पत्नी की मृत्यु से व्यथित थे हरिवंश राय
हरिवंश राय ने लिखा है कि पिता और पत्नी की मृत्यु के बाद वह टूट गए थे। उन्होंने अपनी आत्मकथा के पहले भाग ‘क्या भूलूं क्या याद करूं’ में इस पीड़ा का उल्लेख यह कहते हुए किया है कि उनके दोस्त प्रकाश जौहरी उनकी हालत पर काफी चितिंत थे और चाहते थे कि उन्हें एक जीवनसाथी मिल जाए। तेजी सूरी को देखने के बाद उन्हें उनका ख्याल आया। दोनों को मिलाने के लिए ही उन्होंने उन्हें बरेली आने की दावत दी।
ऐसे बना अमर गीत... झुमका गिरा रे : हरिवंश राय अपनी शादी से पहले तेजी सूरी के बारे में कुछ भी सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे। हालांकि उनकी और तेजी सूरी की शादी की तैयारियां भी चल रही थी। इसी दौरान एक साक्षात्कार में उनसे कहा गया कि अब तो वह अपना प्रेम स्वीकार कर लें।
इस पर हरिवंश राय ने कहा, मेरा झुमका बरेली में गिर गया है। 1966 में आई फिल्म ‘मेरा साया’ के लिए गीतकार राजा मेंहदी हसन ने ‘झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में’ गीत लिखा जो आशा भोंसले के गाने के बाद अमर हो गया।

हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें