रुहेलखंड विश्वविद्यालय में तमाम खामियों के चलते ‘ए’ ग्रेड लटक सकता है। नैक की टीम पहले ही बता चुकी है कि विश्वविद्यालय ने कितने झोल छोड़ दिए हैं। एक-एक गड़बड़ी की ओर से इशारा कर चुकी है। ऐसे में ‘ए’ मिलने की स्थितियां बहुत कम ही दिख रही हैं।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में ऐन वक्त पर नैक मूल्यांकन की तैयारियां की गईं। इसका नतीजा यह हुआ है कि आधी-अधूरी तैयारियों के बीच ही टीम निरीक्षण करने के लिए पहुंच गई। ऐसे में खामियां मिलना लाजिमी था। विश्वविद्यालय ने लैब के उपकरण से लेकर लाइब्रेरी तक में खामियां बताईं। हॉस्टल की गंदी दीवारों पर भी निगेटिव टिप्पणी दी। इसके बाद कुछ विभागों की एकेडमिक बदहाली पर तो कुछ विभाग बंद ही बंद करने को कह गए। कुछ शिक्षकों पर भी टिप्पणियां कीं। रही सही कसर शिक्षकों और कर्मचारियों ने पूरी कर दी। उन्होंने भी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की पोल खोल दी। हालांकि, शिक्षकों ने जो बताया, वह कड़वी सच्चाई था, लेकिन इसका असर ग्रेडिंग पर भी पड़ सकता है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में ऐसी ही तमाम खामियों की वजह से ‘ए’ ग्रेड लटक सकता है। भले ही कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्या ने ‘ए’ पाने का दावा किया था, लेकिन ए ग्रेड के हिसाब से वह तैयारी नहीं कर पाए थे। अगर तैयारियां हो गई होतीं तो ए ग्रेड मिलने में देर नहीं लगती। लेकिन, विश्वविद्यालय प्रशासन को इस बात से कोई मतलब ही नहीं था कि नैक मूल्यांकन होने जा रहा है और उसे अच्छी ग्रेडिंग के लिए मेहनत करनी चाहिए। नैक कोऑर्डीनेटर प्रो. बीआर कुकरेती का कहना है कि उन्होंने तो बहुत तैयारी की। नैक टीम के सदस्यों ने भी उनके काम की सराहना की है। इससे उन्हें लगता है कि विश्वविद्यालय को ए ग्रेड जरूर मिलेगा।