मौसम के संधिकाल में पड़ने वाली नवरात्रि मन ही नहीं तन की बीमारी भी दूर करती है। उल्लास के महीने फागुन के बाद चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाली वासंतिक नवरात्र में जहां हर दिन एक देवी के पूजन का विधान है उनके प्रसाद के रूप में ग्रहण किए जाने वाला सिंघाड़ा आटा, काली मिर्च और तुलसी का सेवन पूरे वर्ष रोगों से मुक्त करता है। ऐसी पौराणिक मान्यता है। इस खानपान से गर्मी में उदर विकार नहीं होते।
वर्ष में नवरात्रि दो बार पड़ती है, एक बार सर्दी से गर्मी के संधिकाल चैत्र में दूसरा बारिश से सर्दी के संधिकाल आश्विन (क्वार) में। उपनिषद, ब्राह्मण ग्रंथ और शाक्त धर्म के अनुसार को मनुष्य के जीवन में मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक तीन कष्ट होते हैं और नवरात्रि में शक्ति प्राप्त कर इन तीनों कष्टों का निवारण किया जाता है। इसीलिए नवरात्रि में जलीय पदार्थ और जलीय फसल के साथ विटामिन सी युक्त भोजन का प्रावधान है जो पेट की बीमारियों को फटकने नहीं देता। यह भी माना जाता है कि पहले तीन दिन तरल, अगले तीन दिन तरलता युक्त ठोस और अंतिम तीन दिन ठोस पदार्थ खाने से पाचन तंत्र सही रहता है।
दिन देवी पूजा खानपान
प्रतिपदा शैलपुत्री सिंघाड़ा आटा
द्वितीया ब्रह्मचारिणी दूध-दही
तृतीया चंद्रघंटा चौलाई
चतुर्थी कूष्मांडा कूष्मांड (कद्दू)
पंचमी स्कंदमाता लाल चावल (तिन्नी का चावल)
षष्ठी कात्यायनी हरी सब्जियां
सप्तमी कालरात्रि काली मिर्च एवं तुलसी
अष्टमी महागौरी साबूदाना
नवमी सिद्धिदात्री आंवला
नीम का भी महत्व
बरेली। आयुर्वेद के अनुसार सही मायने में चैत्र नवरात्रि स्वास्थ्य नवरात्रि है। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में नीम के औषधि रूप में सेवन का भी विधान किया गया है। संस्कृति में नीम को निम्ब कहते हैं। इसके लिए एक श्लोक भी दिया गया है।
निम्ब शीतों लघुग्राही कटुकोडग्रि वातनुत।
अध्यरू श्रमतुट्कास ज्वरारुचिकृमि प्रणतु॥
अर्थात नीम शीतल, हल्का ग्राही पाक में चरपरा हृदय को प्रिय, अग्नि, वात, परिश्रम, तृषा, ज्वर, अरुचि, कृमि, व्रण, कफ, वमन, कुष्ठ और विभिन्न प्रमेह को नष्ट करता है। नीम में कई तरह के लाभदायी पदार्थ होते हैं। चैत्र नवरात्रि पर नीम की नरम पत्तियों को पानी में घोलकर सिलबट्टे में पीसकर इसकी लुगदी तैयार की जाती है। स्वादानुसार थोड़ा नमक और काली मिर्च डालकर उसे ग्राह्य बनाया जाता है। इस पेस्ट को कपड़े में रखकर पानी में छाना जाता है। छाने गए पानी को गाढ़ा या पतला कर रोज सुबह खाली पेट एक कप पीया जाता है। नौ दिन तक इसका सेवन करने से वर्ष भर स्वास्थ्य अच्छा रहता है। यह रस एंटीसेप्टिक, एंटीबैक्टीरियल एंटीवायरल, एंटीवर्म, एंटीएलर्जिक आदि का काम करता है और शरीर से हानिकारक तत्वों को दूर करता है।