जुलाई की शुरुआत में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से आशंका जताई गई थी कि विश्व में कोरोना लंबे समय तक बना रह सकता है। आईवीआरआई और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने इसे काफी हद तक खारिज किया है। हाल ही में सार्क देशों में किए गए व्यापक शोध के बाद दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों की ओर से जारी की गई संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मार्च-अप्रैल 2020 में कोरोना की शुरुआत के बाद एक संक्रमित व्यक्ति से औसतन 2.1 लोगों में संक्रमण फैल रहा था लेकिन अब यह संक्रमण घटकर लगभग आधी रह गई है।
आईवीआरआई और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी के वैज्ञानिकों के शोध में यह भी पता चला कि जिन देशों का स्वास्थ्य सेवाओं का बजट ज्यादा था वहां कोरोना का संक्रमण ज्यादा तेजी से फैला। शोध में शामिल रहे आईवीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार ओआर के मुताबिक वैज्ञानिकों ने इस शोध के लिए तमाम डाटा इकट्ठा किए। शोध में सामने आया कि जो देश स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा खर्च कर रहे थे, वहां कोरोना का फैलाव अधिक रहा है। आवागमन में छूट देने वालों के मुकाबले जिन देशों में लॉकडाउन में कड़ाई की, वहां कोरोना संक्रमण का फैलाव काफी कम रहा है। एक सवाल के जवाब में डॉ. ओआर ने बताया कि ज्यादा स्वास्थ्य बजट वाले देशों में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने का क्या कारण रहा, यह शोध का हिस्सा नहीं था।
आईवीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार ओआर के मुताबिक कोरोना संक्रमण की वजह जानने के लिए वैज्ञानिकों ने सभी सार्क देशों की आबादी, साक्षरता और वहां के लोगों के आयु वर्ग के बारे में तमाम डाटा जुटाया। इन देशों में कोरोना टेस्टिंग के साथ लॉकडाउन और मास्क लगाने की बाध्यता कितनी सख्ती से लागू की गई, यह भी अध्ययन किया। यह भी देखा गया कि स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना खर्च हो रहा है और हवाई सफर करने वालों की तादाद कितनी है।