रियाल की बढ़ी कीमत और हवाई जहाज के किराए की वजह से हर साल हज यात्रा की फीस बढ़ना कोई नई बात नहीं है लेकिन इस बार यह बढ़ोतरी काफी ज्यादा होगी। इस बार हज कमेटी दो बैग भी खरीद कर देगी, जिनकी कीमत हाजियों से वसूली जाएगी।
इस बार सऊदी अरब हुकूमत ने शर्त रख दी है कि हर हज यात्री के पास एक छोटा और एक बड़ा बैग होना चाहिए। अलग-अलग साइज के लगेज नहीं चलेंगे। हज कमेटी किसी कंपनी के माध्यम से बैग बनवा रही है। बरेली हज कमेटी के प्रवक्ता पम्मी खां वारसी ने बताया इस बार ग्रीन कैटेगरी में 22800 रुपये और अजीजिया कैटेगरी में 23600 रुपये बढ़ सकते हैं। ग्रीन कैटेगरी का किराया पिछले साल 1,92,200 रुपये था और अजीजिया कैटेगरी का 1,61,400 रुपये था।
दस साल में दोगुना से ज्यादा
बरेली। हज यात्रा के पिछले दस साल के किराये पर नजर डालें तो यह दो गुना से भी ज्यादा हो चुका है। 2005 में तीन कैटेगरी थी- ग्रीन, व्हाईट और अजीजिया। इसमें अजीजिया का सबसे कम किराया होता था। 2007 से सिर्फ दो कैटेगरी कर दी गईं- ग्रीन और अजीजिया। 2005 में ग्रीन का किराया 90,000 रुपये, व्हाईट का 89,000 और अजीजिया का 84,500 रुपये था। इस साल ग्रीन का 225000 और अजीजिया का 1,85,000 रुपये किराया देना पड़ सकता है।
कुर्बानी की रकम लेने पर फैसला अगले माह
बरेली। सेंट्रल हज कमेटी की ओर से हज यात्रियों से कुरबानी का पैसा लिए जाने का मामला फिलहाल लटकता दिखाई दे रहा है। संकेत मिल रहे हैं कि फतवे और विरोध के बाद इस मामले में सेंट्रल हज कमेटी पुनर्विचार कर सकती है।
इस बार सेंट्रल हज कमेटी ने हज यात्रियों से कुरबानी का पैसा अपने पास लेकर कुरबानी कराने की शर्त रखी थी। जो 600 रियाल बनता है। एसके खिलाफ पहले देवबंद और फिर बरेली के दरगाह आला हजरत स्थित मरकजी दारुल इफ्ता ने फतवा दिया। सेंट्रल हज कमेटी से मिली जानकारी के अनुसार इस मुद्दे पर अगले माह तक कोई फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल हज यात्रा शुल्क की पहली किस्त जमा की जा रही है। इस महीने के बाद कुरबानी का पैसा लिए जाने या न लिए जाने पर बैठक होगी।