बरेली के गांव गजनेरा निवासी सुरेश बाबू ने अल्ट्रासाउंड जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीएम पोर्टल पर बच्चा दिलाने की गुहार लगाई है। तर्क है कि निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच में जुड़वा बच्चे की पुष्टि पर 12 सौ रुपये लिए थे। जबकि एक बच्चा होने पर छह सौ रुपये शुल्क लेते हैं। वहीं, बाद में महिला अस्पताल में भी जांच कराई थी तो वहां भी दो बच्चों की पुष्टि का पता चला था।
आरोप है कि महिला डॉक्टर और स्टाफ ने भी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर जुड़वा बच्चों के जन्म होने पर 24 सौ रुपये मांगे थे। बाद में एक बच्चे का जन्म होने पर 12 सौ रुपये लिए। ऐसे में मेरा एक बच्चा कहां है, इसका संतोषजनक जवाब अब तक नहीं मिला है। इसलिए मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामले में महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक सीएमओ ने जांच शुरू कराई है। रिपोर्ट में सभी तथ्य सामने आएंगे। उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। क्योंकि सीसीटीवी कैमरा में दूसरा बच्चा नहीं दिख रहा।
यह था मामला
भुता क्षेत्र के गांव गजनेरा निवासी सुरेश बाबू की पत्नी राजेश्वरी देवी को आठ दिसंबर को सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी। आशा कार्यकर्ता गुड्डी देवी के साथ वह महिला अस्पताल पहुंचीं। अपराह्न 3:30 बजे एक बच्ची का जन्म हुआ। सुरेश के मुताबिक, करीब तीन माह पूर्व निजी केंद्र पर और पिछले माह महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच कराई थी। दोनों ही रिपोर्ट में जीवित जुड़वा बच्चे होने की पुष्टि हुई थी।
प्रसव के बाद एक ही बच्ची के जन्म को लेकर स्टाफ ने कोई संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया। परिजन अस्पताल के सीएमएस के पास पहुंचे तो उन्होंने भी शुरुआत में अल्ट्रासाउंड जांच में ही तकनीकी खामी की बात कही। बाद में उन्होंने सरकारी जांच रिपोर्ट की मूल प्रति और निजी सेंटर की जांच रिपोर्ट की प्रतिलिपि परिजनों से ले ली। दोनों रिपोर्ट देखने के बाद उन्होंने प्रकरण की जांच के निर्देश दिए।
सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक लेबर रूम में कैमरे नहीं लगे हैं। वहां आवाजाही का दूसरा रास्ता भी नहीं है। बरामदे और अस्पताल परिसर में लगे सीसी कैमरों की फुटेज में प्रसव के बाद छह घंटे तक की फुटेज खंगाली गई, पर दूसरा बच्चा नहीं दिखा। बच्चे जन्म के बाद रोते हैं, यहां दूसरे बच्चे के रोने की आवाज भी नहीं आई। स्टाफ और उनकी दादी ने भी एक ही बच्चे को देखने की बात कही है। जांच जारी है।