उत्तर प्रदेश विधान परिषद यानी एमएलसी चुनाव में पुराने बीडीसी सदस्य ही वोट डालेंगे। ये वे बीडीसी हैं, जो बसपा सरकार में जीते थे और इनमें से अधिकांश अब सदस्य नहीं हैं लेकिन एमएलसी चुनने का मौका वह अपनी पसंद से चुनेंगे। अकेले बरेली में ही इनकी संख्या 1216 है और लगभग आठ सौ पुराने सदस्य रामपुर हैं।
अधिकांश ब्लाकों में सपा के प्रमुख बनवाने वाले नए बीडीसी सदस्यों को एमएलसी चुनाव में आयोग से वोट डालने का अधिकार नहीं मिला है। रामपुर-बरेली एमएलसी सीट पर दो हजार पुराने बीडीसी सदस्य ही वोट डालकर कोई बड़ा गुल खिला सकते हैं। वहीं, इस सीट पर अपना प्रत्याशी न उतारने वाली बसपा भी रणनीति बनाने में जुट गई है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के नेताओं ने अंदरखाने तय कर लिया है कि सत्ताधारी सपा के खिलाफ जो मजबूत पड़ेगा, उसका ही साथ दिया जाएगा। पार्टी के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर साफ कर दिया कि बसपा से जुड़े सदस्य भाजपा के साथ ही खडे़ होंगे। दूसरा विकल्प नहीं है। उधर, बसपा के एक विधायक और एक पूर्व विधायक ने अंदरखाने इस दिशा में मजबूती से काम शुरू कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि दो दिन बाद इसके लिए रणनीति बनाने को पार्टी की बैठक भी बुलाई गई है। इसमें पार्टी के कुछ पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे।