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भीषण सर्द रात फिर भी नहीं जले अलाव

Tue, 09 Jan 2018 01:58 AM IST
बरेली
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शीतलहर के बीच जहां लोग दिन भर ठंड से कांपते रहे, लेकिन उन्हें अलाव नसीब नहीं हुए। नगर निगम की उदासीनता के चलते लकड़ी न पड़ने से सोमवार रात शहर भर में अलाव ठंडे पड़े रहे। ठंड से बचने के लिए कुछ जगह लोगों ने चंदा करके अलाव जलाए तो कुछ जगह राहगीर कूड़ा जलाकर ठंड से राहत पाने की नाकाम कोशिश करते नजर आए।
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सेटेलाइट: प्लेटफार्म ही बना रैनबसेरा
रैन बसेरा बस स्टैंड के दूसरी तरफ है। लोगों को इसकी जानकारी भी नहीं है। इसके चलते यात्री प्लेटफार्म पर ही गर्म कपड़ों में लिपटकर ठंड से बचने का प्रयास करते दिखे। लोगों ने प्लेटफार्म को ही रैनबसेरा बना लिया। लकड़ी न आने के चलते अलाव भी नहीं जला।
जंक्शन: पेड़ के नीचे लेटे दिखे यात्री
इस बार यहां अस्थाई रैन बसेरा नहीं बनाया गया है। अलाव की लकड़ी नहीं आई तो ऑटो चालकों ने चंदा करके 300 रुपये की लकड़ी मंगाई। यहां पर वेटिंग रूम तो यात्रियों से भरा था ही कुछ यात्री प्लेटफार्म के पास पेड़ के नीचे बिस्तर लगाकर लेटे थे।
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चौपुला: कूड़ा जलाकर भगा रहे ठंड
अलाव के लिए लकड़ी यहां भी नहीं पहुंची। इसके चलते रिक्शा चालक कोनों में दुबके नजर आए। दो लोग कूड़ा जलाकर सर्दी से बचने का प्रयास कर रहे थे। आसपास रैनबसेरा न होने के चलते दुकान के शेड के नीचे भी कुछ लोग बिस्तर लगाकर सो रहे थे।
जिला अस्पताल: सिर्फ एक कंबल दिया मरीजों को 
भीषण सर्दी होने के बावजूद जिला अस्पताल की ओर से मरीजों को सिर्फ एक कंबल ही मुहैया कराया गया। इसके चलते अधिकांश मरीज कंबल के ऊपर अपनी रजाई ओढ़े नजर आए। जिनके पास अपनी रजाई नहीं थी, वे कंबल में ही सिकुड़े पड़े थे।
रोडवेज: यहां भी प्लेटफार्म बना ठिकाना
पुराने रोडवेज पर भी रैन बसेरा का कोई इंतजाम नहीं था। यहां भी लोग प्लेटफार्म को ही रैनबसेरा बनाए नजर आए। लकड़ी न आने के चलते अलाव यहां भी नहीं जला। भीषण सर्दी से राहत पाने के लिए रिक्शा चालक और राहगीर कूड़ा जलाकर हाथ सेंकते नजर आए।
शहामतगंज: ठंड में सिकुड़े बैठे रिक्शाचालक
लकड़ी न आने के चलते अलाव ठंडा पड़ा था। इसके चलते रोजाना की तरह यहां आग सेकने वालों की भीड़ भी नहीं थी। सिर्फ दो रिक्शाचालक ही ठंड में भी अपने रिक्शों पर बैठे सवारियों का इंतजार कर रहे थे। मगर सवारियां नदारद थीं।

बातचीत
आज ठंड बहुत ज्यादा है। लकड़ी तो पहले ही कम आती थी लेकिन आज तो बिल्कुल ही नहीं आई है। लोग परेशान हो रहे हैं। - भारत, दुकानदार, सेटेलाइट
हम ऑटो चालक यहां रात भर रहते हैं। नगर निगम ने लकड़ी नहीं डाली। इसके चलते 300 रुपये का चंदा करके खुद ही लकड़ी खरीदी है। - वीरेंद्र, ऑटो चालक, जंक्शन
सीएमएस ने लकड़ी के लिए नगर निगम अधिकारियों को पत्र भी लिखा है। इसके बावजूद आज लकड़ी नहीं आई, जबकि भीषण ठंड है। - राधेश्याम, कर्मचारी, जिला अस्पताल
इतनी ठंडी रात है लेकिन लकड़ी न आने के चलते आज अलाव नहीं जला है। रात काटना मुश्किल हो गया है। सवारियां भी कम आ रही हैं। - सगीर अहमद, रिक्शा चालक, शहामतगंज
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