गोलीकांड के बाद अधिकारी पुलिसकर्मियों के बचाव में उतर आए हैं। वह लापरवाही तो मान रहे हैं, लेकिन पार्टी की बात से इनकार कर रहे हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि दो गोलियां कितनी पिस्टल से चलीं? यह हाल तब है जबकि इंस्पेक्टर से लेकर मुंशी तक निलंबित कर दिए गए हैं। सीओ ने कहा कि यह हादसा है, इसमें कोई साजिश नहीं है।
घायल सिपाही का भी नहीं बता सके नाम
सीओ अनिल से पूछा गया कि गोली किस सिपाही को लगी तो उन्होंने मनोज का नाम बता दिया, जबकि छोटू को गोली लगी थी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी जानकारी दुरुस्त की। उन्हें मुंशी का नाम भी नहीं पता था। थाना स्टाफ की ओर से घटना को छिपाने के बाबत पूछने पर उन्होंने खुद ही सफाई दे डाली।
कहा कि अगले दिन शाम पांच बजे इंस्पेक्टर अस्पताल से आए तो उन्हें घटना की जानकारी दी। इस पर सवाल किया कि जहां इलाज हुआ, वहां से किसी ने पुलिस को जानकारी क्यों नहीं दी? अन्य स्टाफ ने क्यों नहीं बताया? तब उन्होंने कहा घटना को दबाने की बात को दबी जुबान से स्वीकार कर लिया।
दो हिस्सों में हुई गोली, एक टुकड़ा इंस्पेक्टर तो दूसरा सिपाही को लगा
सीओ अनिल के मुताबिक इंस्पेक्टर व सिपाही को दूसरी बार चली गोली लगी है। मुंशी के हैमर रिलीज करने के प्रयास के दौरान जो फायर हुआ, वह गोली कार्यालय के स्लैब पर लगकर दो भागों में बंट गई। इसका एक टुकड़ा यूपीएस से टकराकर सिपाही की भौंह पर लगा और दूसरा टुकड़ा कंप्यूटर के केबल से टकराकर इंस्पेक्टर की ओर घूम गया। यह उनकी नाक के आर-पार हुआ है।