बरेली। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना ‘वृहद पौधरोपण अभियान’ बरेली में दम तोड़ रही है। शनिवार को पौधरोपण की हकीकत का अमर उजाला की टीम ने जायजा लिया तो स्थिति चौंकाने वाली मिली। बिना सेफ्टी गार्ड लगाए गए पौधों पौधों को बकरियां और गायें चर रही थीं। लाखों पेड़ लगाने का दावा भी खोखला निकला। सैकड़ों की तादाद में पौधे बिना रोपे ही फेंक दिए गए।
शुक्रवार को जिले में वृहद पौधरोपण अभियान का शुभारंभ कैंट स्थित धोपा मंदिर के पास रक्षा संपदा विभाग की 11 हेक्टेयर भूमि पर ‘गांधी उपवन’ से हुआ था। यहां केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, सूबे के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल, सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह समेत प्रशासन, पुलिस और अन्य विभागों के आला अफसरों ने पौधे लगाए। कैंट में हुए पौधरोपण की मंच से सराहना करते हुए जिले में अन्य स्थानों पर रोपे गए पौधों के संरक्षण का जोर-शोर से दावा किया गया। पौधरोपण के बाद सभी ने एक दूसरे का मुंह मीठा कराया, फोटो शूट हुआ और सूचना शासन को भेजकर पीठ भी थपथपा ली गई। लेकिन इसमें वन विभाग के अधिकारियों ने बड़ा ‘खेल’ कर दिया। रोपे गए पौधों के संरक्षण की समुचित व्यवस्था नहीं की। लिहाजा शनिवार को माननीयों और अफसरों की ओर से रोपी गई ‘गांधी जी की प्रिय वृक्ष प्रजातियों’ को बकरियां चरती दिखीं। वहीं, सैकड़ों की तादाद में फेंके हुए पौधे भी परिसर में पड़े थे। ‘पंचवटी’ के पौधों को खाने के बाद बकरियां अन्य पौधों की पत्तियां आराम से खाती रहीं, इन्हें रोकने वाला कोई नहीं था।
‘पारिजात, कल्पवृक्ष’ भी चबा गईं
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती और भारत छोड़ो आंदोलन की 77वीं वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर गांधी जी की प्रिय वृक्ष प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इसमें एक पारिजात और दो कल्पवृक्ष के पौधे समेत शीशम, आम, जामुन, बबूल, महुआ, पीपल, बरगद, मौलश्री, आंवला, खैर पौधे लगाए गए हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक कल्पवृक्ष और पारिजात के पौधोें की पत्तियां भी बकरियां खा गईं हैं।
फॉरेस्ट गार्ड कहीं नजर नहीं आया
दोपहर करीब तीन बजे जब अमर उजाला की टीम कैंट के गांधी उपवन में पहुंची तो वहां कोई फॉरेस्ट गार्ड नहीं दिखा। जबकि वन विभाग का दावा था कि पौधों की रखवाली के लिए फॉरेस्ट गार्ड तैनात किया गया है। हालांकि, उपवन में काफी अंदर तीन लेबर पौधों को रोपती दिखाई दिए। जब उनसे बात की गई तो उनका कहना था कि अभी सैकड़ों पौधे लगने बाकी हैं। तेज धूप हुई तो एक दो दिन में सभी पौधे सूख जाएंगे।
‘पौधों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग लगाई गई है। निगरानी के लिए फॉरेस्ट गार्ड भी तैनात किया गया है। जानवरों द्वारा पौधों को नुकसान पहुंचाने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो फॉरेस्ट गार्ड पर कार्रवाई होगी और जिन पौधों को नुकसान हुआ है उन्हेें दोबारा लगाया जाएगा। कुछ पौधे नहीं लग सके थे, वे भी जल्द लग जाएंगे।’
- भरत लाल, डीएफओ