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सुनाई देने लगी मंदी की धमक धीरे-धीरे

Sun, 20 Nov 2016 12:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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Gradually began to hear the reality of recession - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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करेंसी किल्लत का असर उद्योगों पर अब दिखने लगा है। देश का डिजिटलाइजेशन ठीक से हो नहीं पाया है और कैश लेनदेन पर चल रही व्यवस्था पटरी से उतरने लगी है। बरेली शहर में खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े छोटे उद्यमों में मंदी की धमक धीरे -धीरे सुनाई देने लगी है। नमकीन और ब्रेड जैसे दूसरे बेकरी उत्पाद बनाने वाले बता रहे हैं कि फिलहाल उत्पादन में कमी कर रहे हैं। हालांकि वे उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही हालात सुधरेंगे और सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा।
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परसाखेड़ा, सीबी गंज, पुराना शहर, आंवला, बहेड़ी, फरीदपुर आदि इलाकों में संचालित नमकीन, मिठाई, कं फेक्नशरी, बेकरी आदि कारोबार ज्यादा प्रभावित है। प्लोर मिलों ने मनमानी दरें लागू कर दी हैं, गली मोहल्लों में खुला आटा 25 रुपये किलो से कम नहीं मिल रहा है। उधर, एफसीआई ने महंगी दरों पर गेहूं नीलाम कर नया धमाका कर दिया है, इससे महंगाई बढ़ना तय है।

बीस करोड़ का नमकीन कारोबार प्रभावित
घर घर इस्तेमाल होने वाले बिस्कुट और नमकीन उद्योग भी नोट बंदी से प्रभावित है। हर दिन करीब 20 करोड़ रुपये से ज्यादा कारोबार इन दिनों कैश कमी से जूझ रहा है। जिले भर में बड़ी छोटी दो सौ से ज्यादा नमकीन, पापड़, टॉफी आदि की इकाइयां गली मोहल्लों में चल रही हैं। ये कारोबार भी कैश पर चलता रहा है। जाहिर है इस कारोबार में कर की चोरी होती रही होगी लेकिनअचानक  एकदम सौ टका ब्लैक एंड ह्वाइट में आना भी संभव नहीं है। शहर और बाहर के ज्यादातर दुकानदार कैश में ही भुगतान कर माल ले जाते रहे हैं। कुछ बड़ी फर्में ही चेक से भुगतान करती थी। अब उनके पास कैश नहीं हैं और चेक दे नहीं रहे हैं। साख और उधारी के भरोसे काम तो चल रहा है लेकिन धीरे-धीरे उधारी से डर रहे उद्यमियों ने माल कम देना शुरू कर दिया है।  लगभग इकाइयों नकद कैश पर संचालित है। अब करेंसी किल्लत का असर दिखने लगा है। पीके नमकीन प्रोप्राइटर धर्मेंद्र देवनानी ने बताया कि चेक और बैंक से काम करने वाला का कामकाज प्रभावित नहीं है, लेकिन बाजार में वैलिड करेंसी नहीं होने से उधारी ज्यादा हो रही है। 
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एक नमकीन कारोबारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रोडक्शन अभी कम नहीं किया है लेकिन माल डंप है और आगे ऐसा करना पड़ेगा। उधारी पर कब तक सप्लाई देते रहेंगे। 

ब्रेड धंधा मंदा
वानी, गोल्ड हार्वेस्ट, मरकरी, मार्डन, ब्रिटेनिया, कैलोरी आदि ब्रांड की ब्रेड बाजार में उपलब्ध हैं लेकिन शनिवार को शहर की कई फुटकर दुकानों पर ये ब्रेड नहीं पहुंची। करेंसी किल्लत से मांग में की कमी आ गयी है। खास कर ब्रेड कारोबार में करीब 40 प्रतिशत उत्पादन गिरने की बात की जा रही है। उद्यमी मनोहर लाल धीरवानी ने बताया कि  बाजार से रिकवरी कम होने पर उत्पादन कम हो गया है। सर्दियों में ब्रेड की मांग ज्यादा होती है, उम्मीद है कि जल्द हालात सुधरेंगे।

दो माह बनी रहेगी समस्या
 पिछले दिनों केंद्रीय वाणिज्य मंत्री से आपीडा बैनर तले कई उद्यमियों ने मुलाकात कर मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। उद्यमियों ने बताया कि उनके उद्योग किसानों पर आधारित हैं। करेंसी कमी होने से भुगतान नहीं हो रहा है। बैठक में शामिल हाजी शकील कुरैशी के अनुसार मंत्री ने साफ शब्दों में कह दिया कि कालाधन के खिलाफ उठाया गया कदम वापस नहीं होगा। कम से कम दो माह का समस्या बनी रहेगी।

मारिया फ्रोजन के 1000 कर्र्मचारियों की छुट्टी 
मारिया फ्रोजन के चेयरमैन शकील कुरैशी के अनुसार उन्होंने कैश संकट के कारण  अपने संस्थानों में से एक मारिया फ्रोजन को कुछ समय के लिए बंद करने का फैसला किया है और फिलहाल एक हजार अस्थाई कर्मचारियों पर छुट्टी पर भेज दिया गया है। इनको को दिहाड़ी के आधार पर भुगतान होता था।  शकील कुरैशी के अनुसार किसानों से जुड़ा उनका उद्यम सीधे तौर पर कैश में लेनदेन से जुड़ा है। इस मसले को 16 नंवबर को कृषि एवं खाद्य, प्रसंस्करण उत्पाद और निर्यात विकास प्राधिकरण (आपीडा) के चेयरमैन ने भी सरकार के समक्ष उठाया था। उन्होंने कहा कि सरकार का फैसला अब वापस नहीं हो सकता और न ही वापस होना चाहिए लेकिन मौजूदा समय में किसानों ने कैश में लेनदेन संभव नहीं है और ये भी सच है कि वे बैंकिग नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं इसलिए फौरी तौर पर कुछ समय के लिए काम बंद करना ही विकल्प बचता है। उन्होंने बताया कि मारिया फ्रोजन जैसे उद्यमों के लिए ये मंदी आर्थिक आपदा है जिसका किसी तरह सामना किया जाएगा। जिन्हें हटाया जा रहा है उन्हें  हालात सुधरने पर ही बुलाया जाएगा। शनिवार से फैक्ट्री में शटडाउन हो गया। फैक्ट्री बंद होने पर भी करीब दो करोड़ रुपये प्रति माह खर्चा बना रहेगा।


फोटो सहित:
अभी समस्या बनी रहेगी, जो लोग बैंकिंग सिस्टम नहीं अपना रहे हैं, उन्हें आगे ज्यादा परेशान आएगी। कोई भी बदलाव लाने में तमाम समस्याएं आती हैं। इसलिए अभी समय लगेगा।
- घनश्याम खंडेलवाल, अध्यक्ष, चैंबर आफ कामर्स
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सरकार ने कदम सही दिशा में उठाया है लेकिन इससे होने वाले प्रभाव का आंकलन नहीं किया गया। सबसे ज्यादा किसान और छोटा तबका प्रभावित हो रहा है। वाणिज्य मंत्री ने जल्द हालात सुधरने का वादा किया है।
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- हाजी शकील कुरैशी, सदस्य, आपीडा
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