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कई योजनाएं, मोटा बजट, फिर भी एनीमिया का शिकार हो रहीं महिलाएं

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बदायूं। महिलाओं और नौनिहालों को स्वस्थ रखने के लिए तमाम योजनाओं के बावजूद महिलाएं एनीमिया (खून की कमी) और नौनिहाल कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो छह से 59 माह के करीब एक तिहाई नौनिहालों में कुपोषण से खून की कमी है। वहीं जिले में करीब 52 फीसदी महिलाएं एनीमिया का शिकार हैं। यह आंकड़े नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की एक रिपोर्ट में सामने आए हैं।
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मातृ-शिशु मृत्यु दर नियंत्रित करने, नौनिहालों को कुपोषण मुक्त और महिलाओं को एनीमिया मुक्त करने के लिए सरकार विभिन्न योजनाएं चला रही है। राज्य पोषण मिशन के तहत भी कुपोषित बच्चों और एनीमिक महिलाओं की स्थिति में सुधार को पुष्टाहार, पका-पकाया भोजन, दूध, घी, दलिया, वितरण के साथ ही जांच और दवाइयों पर मोटा बजट खर्च हो रहा है। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की एक रिपोर्ट के अनुसार जिले में 52 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। यह सामान्य महिलाओं की स्थिति है। गर्भवती महिलाओं की स्थिति पर गौर करें तो जिले में 60 फीसदी से ज्यादा गर्भवती महिलाओं में खून की कमी पाई गई है। आंकड़ों के मुताबिक जिले में छह से 59 माह तक के एक तिहाई से ज्यादा बच्चे कुपोषण की वजह से खूनी की कमी का शिकार हो रहे हैं। यह स्थिति उनके शारीरिक विकास में बाधा बन रही है।
देहात में स्थिति ज्यादा खराब, 20 फीसदी पुरुष भी एनीमिया की जद में
आंकड़ों पर गौर करें तो शहरों के मुकाबले देहात में स्थिति ज्यादा खराब है। संतुलित आहार न लेने, मासिक धर्म के दौरान लापरवाही करने और जागरूकता की कमी की वजह से देेहात में हर 10 में औसत सात महिलाएं खून की कमी का शिकार हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं में यह स्थिति चिंता का विषय है। इतना ही नहीं संतुलित आहार न लेने की वजह से जिले में करीब 20 फीसदी पुरुष भी खून की कमी का शिकार हैं।
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नौनिहालों- महिलाओं में खून की कमी
शहरी-----ग्रामीण------कुल
सामान्य महिलाएं 49 साल तक--------52-------65--------52
गर्भवती महिलाएं 49 साल तक--------60-------69--------62
नौनिहाल 59 माह तक---------------45.2-----64--------68
(सभी आंकड़े प्रतिशत में)
विशेषज्ञ की बात-
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचि गुप्ता का कहना है कि महिलाएं अक्सर खान-पान पर ध्यान नहीं देतीं। गांव की महिलाओं में यह प्रवृत्ति ज्यादा है। गर्भवती महिलाओं को ज्यादा पोषक आहार लेना चाहिए। हरी और पत्तेदार सब्जियों के साथ दालों और मौसमी फलों का इस्तेमाल करना चाहिए। पेट में तेज दर्द होना, कमजोरी महसूस होना, जल्दी थक जाना, सांस फूलना, योनि से खून बहना, पैरों में सूजन होना, खून की कमी के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ से परामर्श लें। उसकी सलाह के मुताबिक खानपान और दवाओं का सेवन करें।
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